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सदस्यों का इंतजाम पूरा है.. टिकट दिला दीजिए, जीत जाएंगे

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बदायूं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के साथ ही ब्लॉक प्रमुख का चुनाव होने की संभावना के तहत ब्लॉक क्षेत्रों में दावेदारों ने अभी से पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा और सपा से टिकट के दावेदार पार्टी जिलाध्यक्षों के पास तक अपने आवेदन भी पहुंचा चुके हैं लेकिन उन्होंने पार्टी नेताओं का रुख अपनी ओर करने के लिए राजनीतिक परिक्रमा भी शुरू कर दी है।
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कई ब्लॉक क्षेत्र में खासकर भाजपा से टिकट पाने को दावेदारों की फेहरिस्त भी काफी लंबी होती जा रही है। आवेदन करने के बाद अब ऐसे दावेदार पार्टी नेताओं को यही समझाने की कोशिश में जुटे हैं कि क्षेत्र पंचायत सदस्यों का इंतजाम तो पूरा हो चुका है। उन्हें टिकट दिला दिया जाए, इसके बाद जीतने से कोई रोक नहीं पाएगा।
जिले में 15 ब्लॉक क्षेत्र हैं। ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में काफी हद तक सत्ता का दखल देखने को मिलता रहा है, सो इस बार भाजपा से टिकट के दावेदारों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। बताते हैं कि भाजपा से जुड़े कुछेक दावेदार टिकट को ही जीत का आधार मानकर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे दावेदारों ने पार्टी के अंदर बड़े नेताओं की परिक्रमा भी शुरू कर दी है। कुछेक सीटों पर भाजपा के अंदर ही दो-तीन दावेदार सामने आ चुके हैं। कमोबेश ऐसा ही माहौल सपा में भी बताया जा रहा है।
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सपा समर्थक क्षेत्र पंचायत सदस्यों की संख्या भी कोई खास कम नहीं है। पार्टी जिलाध्यक्ष तक उनके भी आवेदन पहुंच चुके हैं लेकिन भाजपा और सपा में टिकट पर अंतिम निर्णय चुनाव से सप्ताह भर पहले ही होने की उम्मीद बताई जा रही है। देहात क्षेत्र में चुनावी रणनीति के जानकारों की मानें तो पंचायत चुनाव का रिजल्ट आने के बाद से ही कई दावेदार क्षेत्र पंचायत सदस्यों के संपर्क में नजर आने लग गए थे। सदस्यों को बधाई के साथ मिठाई भी भेंट की जा रही है। ताकि समय आने पर उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने में दिक्कत नहीं आए।
ब्लॉक प्रमुख चुनाव में धन-बल पर जोर
उझानी। ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर काबिज होने के लिए दावेदारों को सदस्य संख्या जुटाने के लिए तमाम तरह से कोशिश करनी होती है। बताते हैं कि दावेदार अपने समर्थक सदस्यों को हर स्तर से लुभाने की कोशिश करते हैं। घर से बुलाकर किसी ऐतिहासिक या फिर पर्यटक स्थल का टूर कराने, टूर के दौरान सेवा-सत्कार करने और दूसरे खेमा से टूटकर आने वाले को आर्थिक फायदा भी पहुंचाना इसमें शामिल है। इसके बाद भी कोई कसर रह जाए तो बल का इस्तेमाल करने से वह गुरेज नहीं करते। पिछले चुनावों में ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य इस हकीकत काफी हद तक वाकिफ हैं।
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