बदायूं। अपर सत्र न्यायाधीश मिर्जा जीनत ने बृहस्पतिवार को मां-बेटे के अपहरण व दुष्कर्म करने के तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। दुष्कर्म के दोषी को 20 साल तो अपहरण में सहयोग करने वाले पिता व भाई को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। एक पर 31 हजार तो दो पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मूसाझाग थाना क्षेत्र के एक गांव के रहने व्यक्ति ने एसएसपी के आदेश पर थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि 17 जुलाई 2015 को वह खेत में धान की पौध लगाने गया था। 18 जुलाई की सुबह जब वह घर लौटा तो उसकी पत्नी और बेटा (5) नहीं थे। उन्होंने परिजनों से पूछताछ की। 26 जुलाई 2015 को उन्हें एक पत्र मिला। इसके साथ ही मोबाइल पर फोन आया। उससे एक लाख रुपये फिरौती मांगी गई। इस पर उन्होंने तीस हजार रुपये चिंजरी गांव के प्रधान महावीर के सामने भगवान सिंह व बृजपाल को दे दिए, लेकिन उसकी पत्नी व बेटा नहीं मिला।
बाद में पुलिस ने महिला व बच्चे को बरामद कर लिया। महिला को न्यायालय में पेश किया गया। महिला ने मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव परसुआ निवासी कल्लू पर दुष्कर्म का आरोप लगाया। बताया कि कल्लू के पिता दुर्विजय और भाई रमन ने उसका बेटे के साथ अपहरण किया था। बयानों के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म, अपहरण आदि धाराओं की बढ़ोतरी करते हुए विवेचना शुरू की। न्यायालय में कल्लू को दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा के साथ ही 31 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उसके पिता दुर्विजय व भाई रमन को अपहरण में सहयोग करने के आरोप में दोषी करार देते हुए पांच -पांच साल की सजा सुनाई है। दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।