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ककराला में तेंदुए के पगचिह्नों की सूचना पर पहुंचीं डीएफओ

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अलापुर। वन विभाग के 20 अधिकारियों और कर्मचारियों की दो टीमें चार दिन से तेंदुए की तलाश में कांबिंग में जुटी हैं। अब तक न तो कहीं तेंदुआ दिखा है और न उसके पगचिह्न मिले हैं। तीन दर्जन से ज्यादा गांवों में टीमें पहुंच चुकी हैं। मंगलवार को कुछ लोगों ने ककराला कस्बे के खेतों में तेंदुए के पगचिह्न होने की सूचना दी। जिस पर डीएफओ ईशा तिवारी ने ककराला टाउन के जंगल में तेंदुए के पगचिह्न मिलने की सूचना पर कांबिंग की। जांच में पता लगा कि यह पगचिह्न तेंदुए के नहीं बल्कि लकड़बग्घे के हैं। पुराने और मंगलवार को मिले पगचिह्न का मिलान भी किया जा रहा है। इस दौरान वन क्षेत्राधिकारी रविंद्र सिंह बिष्ट मौजूद रहे।
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शुक्रवार को अलापुर के गांव कटिया में नूरुल नाम के किसान पर जंगली जानवर ने हमला किया था। नूरुल ने तेंदुआ होने का दावा किया। शनिवार को वन संरक्षक बरेली के नेतृत्व में कांबिंग के दौरान कटिया में तेंदुए के पगचिह्न मिले थे। इसके बाद से कांबिंग जारी है। तेंदुआ के पग चिह्न के फोटो की पड़ताल टाइगर रिजर्व के एक्सपर्ट से कराने का निर्णय लिया गया है। दरअसल, उसके बाद से अब तक न तो पगचिह्न मिलना और न तेंदुए को कहीं देखे जाने को लेकर अब संशय पैदा हो रहा है। पांच दिन में तेंदुए ने किसी जंगली जानवर पर भी हमला नहीं किया है। जंगल में जानवर का कोई कंकाल भी नहीं मिला है।
पूरे इलाके में 24 घंटे कांबिंग की जा रही है। यह बात सही है कि तेंदुए को अब तक कहीं नहीं देखा गया है। मंगलवार को पगचिह्न मिलने की सूचना पर जांच कराई गई। यह लकड़बग्घा के निकले हैं। मैंने भी कई इलाकों में टीम के साथ तेंदुए की तलाश में कांबिंग की और ग्रामीणों को सचेत किया। - ईशा तिवारी, डीएफओ
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