अलापुर। कस्बे में रामलीला मैदान के पास संचालित पशु चिकित्सालय सालों से बंद पड़ा है। यहां न तो डॉक्टर ही हैं न ही दवाएं। ऐसे में क्षेत्र के दस हजार से अधिक पशुपालक परेशान हैं। अनदेखी के चलते भवन भी खंडहर हो गया है।
पशु अस्पताल से क्षेत्र के करीब दर्जन भर गांव में रहने वाले 10 हजार पशु पालक जुड़े हुए हैं। छह साल पहले यहां तैनात डॉक्टर का तबादला हुआ तो उसके बाद किसी डॉक्टर की तैनाती ही नहीं की गई। किसान अपने मवेशियों का इलाज निजी पशु चिकित्सकों से मनमानी फीस देकर कराने को मजबूर हैं। पशु पालकों ने अस्पताल की मरम्मत के साथ ही डॉक्टर की तैनाती करने की कई बार मांग की, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की मार दस हजार पशु पालकों को झेलनी पड़ रही है।
समय से नहीं मिल पाता उपचार
पशुचिकित्सालय में डॉक्टर न आने से लोगों को बहुत दिक्कत होती है। मवेशी बीमार पड़ जाता है तो उसे समय से उपचार नहीं मिल पाता। इस कारण इधर-उधर भागना पड़ता है। -प्रदीप कुमार
जेब पर पड़ती है महंगाई की मार
अस्पताल काफी समय से बंद पड़ा है। उसमें कोई बैठता नहीं है। इस कारण निजी डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ता है। उनकी महंगी दवा और डॉक्टर की फीस से जेब ढीली हो जाती है। - राधे लाल
यहां पर एक कर्मचारी तैनात था भवन जर्जर होने के चलते उसे दूसरी जगह अटैच कर दिया गया है। भवन कंडम घोषित कर दिया गया है। नया भवन बनते ही कर्मचारी तैनात कर दिए जाएंगे। - डॉ. ज्ञानवीर सिंह, पशु चिकित्साधिकारी, म्याऊं
प्रदीप कुमार।