तीन साल पहले ग्राम पंचायत मजरा गंगवरार के समीप पट्टेदार और भूमिधर किसानों की भूमि को छीन लिया गया था। इस संबंध में मुख्यमंत्री तक शिकायतें की गईं, जांचे भी हुईं लेकिन आजतक इस बात का जवाब सामने नहीं आया है कि जब उस इलाके का नक्शा ही राजस्व विभाग पर नहीं है तो पैमाइश किसा आधार पर हो गई।
पूर्व प्रधान राजेश्वर सिंह ने कई वर्षों से पीड़ित किसानों की यह लड़ाई जारी रखी है। मुख्यमंत्री तक शिकायत हो चुकी है, जांचे भी हुई हैं लेकिन कोई परिणाम नहीं निकल सका है। इसका जवाब किसी के पास नहीं है कि बिना नक्शा नजरी के पैमाइश कैसे हो गई। इस लंबित प्रकरण की शिकायत इस बार तहसील दिवस में रजिस्टर्ड हुई है। निस्तारण कैसे होगा यह अधिकारी ही बता सकेंगे।
सदर तहसील के गांव मजरा गंगवरार में ग्राम पंचायत की भूमि मानकर जिस राजस्व विभाग ने पट्टे किए। राजस्व विभाग उससे भी पीछे हट गया है। आसपास के भूमिधर किसान और पट्टे धारकों की जमीनें छीनकर पिछली बार वन विभाग को दे दी गई है। इस बीच लंबा विवाद चला। नक्शा नजरी का पता किया गया तो राजस्व विभाग और वन विभाग ने उपलब्ध नहीं कराया।
डीएम के आदेश पर अब एसडीएम को जांच
पिछले माह इस प्रकरण में डीएम से शिकायत की गई थी। डीएम को दी गई शिकायत पर एडीएम प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव ने एसडीएम सदर प्रदीप यादव को जांच दी है। एक सप्ताह में यह जांच पूरी करने को कहा गया था लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी है।
यहां तक पहुंच चुकी हैं प्रकरण की शिकायतें
मुख्यमंत्री के शिकायत प्रकोष्ठ
विशेष कार्याधिकारी मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री के निजी सचिव
मंडलायुक्त बरेली
लोक सेवा प्रबंधन
जिलाधिकारी
एसडीएम सदर
वन विभाग के उच्चस्थ अधिकारी
परिणाम: मुख्यमंत्री के आदेश से लेकर अन्य जिन वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जांच हुई है, सभी जांचों से शिकायत कर्ता संतुष्ट नहीं है। उनका एक सबल सवाल आज भी जस के तस है। जब इस एरिया का नक्शा नहीं था तो पैमाइश कैसे हो गई।