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Budaun News: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

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कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते ​शिक्षक-​शि​क्षिकाएं। स्रोत संगठन
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बदायूं। सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्य कर दी है। इस आदेश के खिलाफ सोमवार को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले जिले में सैकड़ों शिक्षक सड़कों पर उतर आए। संगठन के आह्वान पर शिक्षकों ने प्रदर्शन करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा।
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जिला संयोजक दुष्यंत कुमार रघुवंशी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से अधिक हो गई है। उन्हें टेट पास करना अनिवार्य कर दिया है। उनकी नियुक्ति उस समय की गई थी, जब टेट की शर्त लागू नहीं थी। वर्ष 2011 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ। उससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता लागू नहीं थी। ऐसे में अब अचानक शर्त थोपना अव्यवहारिक है।
जिला सह संयोजक प्रदीप गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर देशभर के 780 जिलों में एक साथ यह ज्ञापन दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है। प्रधानमंत्री से अपेक्षा है कि वह वैध नियमों के तहत नियुक्त अनुभवी शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और गरिमा की रक्षा करें।
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जिला सह संयोजिका सोनी गुप्ता ने कहा कि यह आंदोलन का पहला चरण है। यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे और बड़े स्तर पर आंदोलन चलाया जाएगा। जब तक शिक्षकों को न्याय नहीं मिलेगा, विरोध जारी रहेगा। इस मौके पर अंकुर कुमार, धीरज शर्मा, लखेंद्र सिंह राठौर, अनुराग गुप्ता, आदेश कुमार सिंह, मनोज कुमार, जितेंद्र सिंह, दिवाकर शर्मा, मुकुल राठौर आदि मौजूद रहे।

शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग

- महिला शिक्षक संघ ने सांसद और विधायक को सौंपा ज्ञापन



संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मौर्य के नेतृत्व में जिला इकाई के पदाधिकारियों ने सोमवार को सांसद आदित्य यादव और सदर विधायक महेश चंद गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष सीमा यादव और जिलाध्यक्ष किरन सिंह सिसौदिया ने कहा कि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण अनिवार्य करना अनुचित है, क्योंकि ये शिक्षक लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के बीते एक सितंबर के निर्णय में संशोधन कर पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की। इस अवसर पर जिला मंत्री वीरबाला सिंह, कोषाध्यक्ष वीना सिंह, सरोजिनी गुंज्याल, एकता गुप्ता, कोमल अंजुम खान, अलका भोला, दीपशिखा, हंसी नागर, अलका सागर, डोली, शांति, राखी, स्मृति परमार, नाहिद फरहान अंसारी, रजनीश कुमारी सहित महिला शिक्षक संघ की अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहीं।
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