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एक से अधिक स्कूल संभाल रहे शिक्षकों को मिलेगी मुक्ति

Tue, 27 Oct 2015 08:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
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काबिलेगौर हो कि जिले के तमाम प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। लिहाजा, उनके स्थान पर खंड शिक्षाधिकारियों ने अपने कृपापात्र शिक्षकों को चार्ज दे रखा है। काफी समय से ऐसे शिक्षक अतिरिक्त स्कूलों का चार्ज संभाले हुए हैं। वजह उसकी यह भी है कि यूनिफार्म से मिलने वाली कमीशन और एमडीएम आदि से भी उन शिक्षकों को भारी मुनाफा होता है। सो वह खंड शिक्षाधिकारियों से मिलकर उन स्कूलों को चलाते रहते हैं। भले ही वह अपने मूल स्कूल तक को सप्ताह में एक दिन का भी पर्याप्त समय नहीं दे पाते हों। चूंकि साब की कृपा है सो वह मोबाइल से ही उन स्कूलों का संचालन करते रहते हैं। शिक्षकों को भी मोबाइल से ही गाइड करते रहते हैं।
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एक शिक्षक पर कई-कई स्कूलों का चार्ज होने की शिकायतें विभागीय अफसरों के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों से ही होती रही हैं लेकिन उन शिकायतों को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया सो ऐसे शिक्षक अपने काम में लगे रहते हैं। सूत्र बताते हैं कि बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा के सामने भी इस तरह की कुछ शिकायतें आईं हैं। जिनमें उल्लेख किया गया है कि वो शिक्षक न तो अपने स्कूल को ही समय देते हैं और न ही अतिरिक्त चार्ज संभाले स्कूल को। लिहाजा, वहां पर शिक्षण कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित रहता है। बीएसए ने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी खंड शिक्षाधिकारियों को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने एक से अधिक स्कूलों का चार्ज संभाले स्कूल संभालने वाले शिक्षकों की सूची मांगी है।

इन्हें किया जा सकता है समायोजित
बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षकों की भर्ती कर रहा है। 15 हजार बीटीसी प्रशिक्षुओं की तैनाती के लिए काउंसिलिंग चल रही है। बदायूं जिले में चार सौ शिक्षकों की तैनाती होगी। इसके अलावा 1100 प्रशिक्षु शिक्षकों की भी भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। उनकी काउंसिलिंग शुरू होने वाली है। इस तरह एक माह के अंदर जिले में डेढ़ हजार शिक्षकों की तैनाती होगी। चर्चा इस बात की है कि इन्हीं शिक्षकों को उन स्कूलों में तैनात कर प्रधानाध्यापकों का अतिरिक्त चार्ज सौंपा जाएगा।
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नहीं दिखा पाएंगे रौब
एक से अधिक स्कूलों की जिम्मेदारी संभालने वालों में कई तो एनपीआरसी हैं जो उन सभी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों पर अपना पूरा रौब दिखाते हैं, लेकिन जल्द ही उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाएगा। तब शायद वह शिक्षकों पर अपना रौब नहीं दिखा पाएंगे।
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