फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वाइन फ्लू से युवक की मौत, हड़कंप

Tue, 24 Feb 2015 11:55 PM IST
बदायूं
विज्ञापन
विज्ञापन
आखिरकार स्वाइन फ्लू यहां भी पहुंच गया। इस सत्र में स्वाइन फ्लू से जिले में मौत का पहला मामला सामने आया है। बदायूं के युवक की इलाज के दौरान बरेली के एक निजी अस्पताल में मंगलवार को मौत की खबर से सेहत महकमे में हड़कंप है। मृतक के गांव पहुंच कर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संदिग्ध रोगियों की तलाश की। वहीं, भयवश गांववासियों ने मृतक के परिजनों से दूरी बना ली है।
विज्ञापन

उझानी क्षेत्र के गांव सिरसोली निवासी नफीस (34) पुत्र मुवीन उर्फ मेंहदी को छह दिन पहले तेज बुखार आया था। परिवार वाले उसे जिला अस्पताल ले आए। यहां से नफीस को बरेली रेफर कर दिया गया। वहां से भेजे गए नमूने पर स्वाइन फ्लू की पुष्टि की रिपोर्ट पीजीआई लखनऊ से सोमवार को ही आई थी। एच1 एन1 वायरस की पुष्टि के बाद नफीस स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में था।
नफीस कई साल से परिवार समेत दिल्ली में रहकर नौकरी करते थे। डेढ़ महीने पहले ही वह परिवार के साथ गांव लौटे थे। स्वाइन फ्लू से नफीस की मौत के बाद सिरसोली के ग्रामीण दहशतजदा हैं। नफीस के कई पड़ोसी अपने घरों को छोड़कर चले गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया है। नफीस की मौत से दहशत में आए इनके कई पड़ोसी अपना घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर चले गए हैं। गांव वाले भी उसके घर की ओर नहीं जा रहे हैं।
विज्ञापन

डीएम शंभूनाथ ने बताया कि स्वाइन फ्लू से मौत होने की जानकारी मिली है। जिले में एलर्ट कर दिया गया है। सीएमओ को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। जनता को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। जागरूकता जरूरी है।
चार साल बाद स्वाइन फ्लू ने उठाया फन
जिले में चार साल के बाद स्वाइन फ्लू से मौत का मामला सामने आया है। इससे पहले 2010 में ककराला के एक व्यक्ति की स्वाइन फ्लू से मौत हुई थी। 2012 में भी ककराला में ही एक महिला स्वाइन फ्लू का शिकार हुई थी। समय रहते इलाज मिलने से इसकी जान बच गई। उझानी के सिरसोली निवासी नफीस की स्वाइन फ्लू से मौत के बाद गांव के लोग दहशत में हैं। स्वास्थ्य विभाग एलर्ट हो गया है। उझानी सीएचसी प्रभारी डॉ. विश्वास अग्रवाल ने टीम के साथ गांव पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया।
नफीस के परिवार में पत्नी समेत तीन बेटियां और एक बेटा है। सबसे छोटी बेटी की उम्र आठ साल है। इनको स्वाइल फ्लू की पुष्टि और बाद में मौत से यह तो साफ हो गया है कि वायरस बदायूं पहुंच चुका है। डेढ़ महीने से नफीस परिवार के साथ गांव में ही रह रहे थे। स्वास्थ्य विभाग अब यह जानने में लगा है कि नफीस तक स्वाइन फ्लू का वायरस कैसे पहुंचा। डॉक्टरों की मानें तो स्वाइन फ्लू का वायरस 72 घंटे में असर दिखाता है। नफीस के मामले में ऐसा नहीं हुआ। बता दें कि 2010 में ककराला निवासी जितिन प्रकाश गुप्ता की स्वाइन फ्लू से मौत हुई थी। इसके दो साल बाद 2012 में ककराला निवासी अशरफुलनिशा पत्नी डॉ. अब्दुल हनीफ (एएच1एन1) स्वाइन फ्लू की चपेट में आई थीं। समय रहते इनको इलाज मिल गया। इससे इनकी जान बच गई। जिले में स्वाइन फ्लू से यह दूसरी मौत है।
हौव्वा बना स्वाइन फ्लू, 1200 लोगों ने पी दवा
पब्लिक को स्वाइन फ्लू का खौफ सताने लगा है। जिला अस्पताल स्थित होम्योपैथिक चिकित्सालय में मंगलवार को 1200 लोगों ने स्वाइन फ्लू की दवा इंफ्लूएनजिनम पी। अस्पताल में दवा पीने वालों की भीड़ उमड़ने पर यहां अव्यवस्थाएं फैल गईं। इस पर पुलिस को पहुंच कर स्थिति संभालनी पड़ी। होम्योपैथिक अस्पताल में तीन दिन से स्वाइन फ्लू की दवा पिलाई जा रही है। होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. रागिनी गुप्ता ने बताया कि बुधवार को भी दवा पिलाई जाएगी।
दवा पीकर बेहोश हुई लड़की
होम्योपैथिक अस्पताल में स्वाइन फ्लू की दवा इंफ्लूएनजिनम पीने के बाद उझानी के चटइया टोला के जलीलउद्दीन की 14 वर्षीय बेटी शिमरन बेहोश हो गई। किशोरी के बेहोश होने पर यहां हड़कंप की स्थिति बन गई। करीब दस मिनट के बाद उसे होश आया।
स्थानीय स्तर पर खरीदी जाएगी दवा
शासन ने स्थानीय स्तर पर स्वाइन फ्लू की दवा खरीदने का आदेश जारी कर दिया है। स्वाइन फ्लू के मरीजों को दी जाने वाली दवा ओसेल्टामीवीट की सप्लाई अस्पतालों में शासन स्तर से होती है। शासन स्तर पर दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। शासन ने सीएमओ और एसएमएस को आदेश जारी करके कहा है कि वह स्थानीय स्तर पर दवाइयों की खरीद कर लें।
स्वाइन फ्लू का संदिग्ध पहुंचा अस्पताल
शहर के मीरा सराय मंदिर के पास रहने वाले मैकू मंगलवार को जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने प्रथम दृष्टया उनमें स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए। इनको भर्ती होने के लिए कहा गया लेकिन यह दवा लेकर चले गए।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें