स्वाइन फ्लू से मौत के बाद सिरसौली में दहशत का माहौल है। नफीस के परिवार वाले भी दहशतजदा हैं। आसपास के कुछ लोगों ने तो एहतियातन घर छोड़ दिया है। स्वाइन फ्लू के वायरस की दस्तक के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में जागरूकता के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं। जानकारों की मानें तो बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से वायरस जल्द फैलने का अंदेशा रहता है। गांव की आबादी करीब 15 हजार है। यहां तीन हजार से ज्यादा मतदाता हैं। इतनी बड़ी आबादी को स्वास्थ्य विभाग ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
नफीस के घर नहीं पहुंची टीम
बदायूं। स्वाइन फ्लू से मौत होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नफीस के घर पर जाना जायज नहीं समझा। गांव के बाहर प्राथमिक विद्यालय के पास हेल्थ कैंप लगाकर इतिश्री कर ली। नफीस के परिवार में उनकी मां और पत्नी समेत एक बेटा, तीन बेटियां हैं। बुधवार को इनके स्वास्थ्य की जांच भी नहीं की गई।
दवा के नाम पर तीन गोलियां
बदायूं। सिरसौली में हेल्थ कैंप के दौरान ग्रामीणों को दवा के नाम पर सेप्ट्रॉन, पैरासिटामॉल और डी-वैस्ट नाम की तीन-तीन गोलियां बांट दी गईं। गांव वालों का आरोप है कि स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूरी की गई है।