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सुदामा चरित्र सुनकर श्रोता हुए भावविभोर

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मौमसपुर के ब्रह्मदेव धाम परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में हरलेश चैतन्य महाराज ने सुदामा चरित्र के प्रसंग सुनाए। कहा, सुदामा ने गरीबी के दिनों में भी मित्र के सामने दिक्कत बयां नहीं की थी।
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हरलेश चैतन्य महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के आधार पर कृष्ण और सुदामा की मित्रता का आज भी लोग उदाहरण दिया करते हैं। सुदामा की दरिद्रता के बारे में कृष्ण सब कुछ जानते थे। कृष्ण को यह भी विश्वास था कि उनके बचपन का सखा भूखा रह सकता है, लेकिन किसी को अहसास नहीं होने देगा। कृष्ण ने उसका भी कल्याण कर दिया।
कथवाचक चैतन्य महाराज ने नारी जीवन पर भी प्रकाश डाला। कहा कि नारी का जीवन उसी हालत में सफल है, जब वह आपत्तिकाल में भी अपने सतित्व पर आंच नहीं आने दे। वह घर की लक्ष्मी होती है, उसी नजरिए से सम्मान मिलना चाहिए। कथा के दौरान चैतन्य महाराज ने कंस वध का प्रसंग भी सुनाया। कंस का वध पाप के अंत का प्रतीक है।
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भक्तों ने किया कथावाचक को सम्मानित
उझानी। कोतवाली वाले मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत का बृहस्पतिवार रात भजन-कीर्तन के साथ समापन हो गया। कथावाचक राजेंद्र सिंह शास्त्री को न्यू लिटिल एंजिल स्कूल की प्रधानाचार्या शशि भार्गव ने सम्मानित किया। उनकी संगीत टोली ने भी सम्मान पाया। समापन पर महिला भक्तों की ओर से प्रसाद वितरण कराया गया।
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