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UP News: दो लाख का इनामी सुमित चौधरी गिरफ्तार, आठ साल पहले बदायूं जेल की दीवार फांदकर भागा था बदमाश

Thu, 25 Sep 2025 05:19 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

एसटीएफ बरेली यूनिट ने दो लाख के इनाम बदमाश सुमित चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। वह आठ साल पहले बदायूं जेल की दीवार फांदकर भाग गया था। तब उसकी तलाश की जा रही थी। सुमित नेपाल भागने की फिराक में था।
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आरोपी सुमित चौधरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली जोन में सबसे ज्यादा दो लाख के इनामी सुमित चौधरी को एसटीएफ ने बृहस्पतिवार सुबह विलयधाम के पास से गिरफ्तार कर लिया। मुरादाबाद निवासी सुमित वर्ष 2015 में मुरादाबाद कचहरी में ब्लॉक प्रमुख योगेंद्र उर्फ भूरा की हत्या का प्रमुख आरोपी है। 

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वर्ष 2018 में सुमित बदायूं जेल से रस्सी के सहारे दीवार कूदकर भाग गया था। वह कभी नेपाल तो कभी देश के ही अन्य राज्यों में छिपकर रह रहा था। वह दोबारा नेपाल भागने की कोशिश में था कि एसटीएफ की पकड़ में आ गया। टीम उसे बदायूं के सिविल लाइंस थाने ले गई। फिलहाल, उसे बदायूं जेल की सघन सुरक्षा वाली बैरक में रखा गया है।

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कचहरी परिसर में की थी पूर्व ब्लॉक प्रमुख की हत्या 
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक अब्दुल कादिर ने बताया कि मुरादाबाद के थाना हजरतगढ़ी में मोहल्ला नवैनी गद्दी निवासी सुमित चौधरी बरेली जोन का सबसे पुराना व वांछित अपराधी है। वह 2015 में मुरादाबाद के डिलारी ब्लॉक प्रमुख रहे योगेंद्र उर्फ भूरा की कचहरी परिसर में हत्या का मुख्य आरोपी है। उसे घटना के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। शुरू में वह मुरादाबाद जेल में बंद रहा। फिर उसे प्रशासनिक आधार पर बदायूं जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था।

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जेल में सुमित और दूसरे बंदी गोरखपुर निवासी चंदन ने 12 मई 2018 को रस्से के सहारे दीवार फांदकर फरार होने की योजना बनाई। सुमित तो दीवार कूदकर भाग गया, लेकिन चंदन गिरकर घायल हो गया था। सुमित के फरार होने के चार महीने बाद एडीजी अपराध ने उस पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। वह पहचान छिपाकर दिल्ली, मेरठ, तमिलनाडु, असम और ओडिशा में रह रहा था। वह काफी समय तक नेपाल में भी रहा।

राह चलते लोगों से फोन मांग कर करता था परिजनों से बात 
सुमित बेहद शातिर शख्स है। उसके परिवार के कई सदस्य पुलिस विभाग में हैं। इसलिए सुमित को पुलिस की सर्विलांस पर निर्भरता और सेल के कामकाज के बारे में काफी जानकारी थी। वह मोबाइल नहीं रखता था। किसी भी परिजन से वह मोबाइल फोन के जरिये बात नहीं करता था और सोशल मीडिया पर भी किसी से संपर्क नहीं करता था। उसे साल में एक या दो बार जब परिवार से बात करनी होती थी तो दूसरे शहर में जाकर राह चलते लोगों से मोबाइल लेकर किसी भरोसेमंद पड़ोसी को कॉल कर लेता था। 

वह उसके घर जाकर परिजनों से बात करा देते थे। एसटीएफ को कई बार इसके संकेत मिले तो भी वह सिर्फ उस राह चलते शख्स तक पहुंच पाई जिसके नंबर से सुमित ने बात की, लेकिन उससे पहले ही सुमित वह शहर छोड़ देता था। सुमित शुभम शर्मा नाम के फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करता था। 



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