जेल में सुमित और दूसरे बंदी गोरखपुर निवासी चंदन ने 12 मई 2018 को रस्से के सहारे दीवार फांदकर फरार होने की योजना बनाई। सुमित तो दीवार कूदकर भाग गया, लेकिन चंदन गिरकर घायल हो गया था। सुमित के फरार होने के चार महीने बाद एडीजी अपराध ने उस पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। वह पहचान छिपाकर दिल्ली, मेरठ, तमिलनाडु, असम और ओडिशा में रह रहा था। वह काफी समय तक नेपाल में भी रहा।
राह चलते लोगों से फोन मांग कर करता था परिजनों से बात
सुमित बेहद शातिर शख्स है। उसके परिवार के कई सदस्य पुलिस विभाग में हैं। इसलिए सुमित को पुलिस की सर्विलांस पर निर्भरता और सेल के कामकाज के बारे में काफी जानकारी थी। वह मोबाइल नहीं रखता था। किसी भी परिजन से वह मोबाइल फोन के जरिये बात नहीं करता था और सोशल मीडिया पर भी किसी से संपर्क नहीं करता था। उसे साल में एक या दो बार जब परिवार से बात करनी होती थी तो दूसरे शहर में जाकर राह चलते लोगों से मोबाइल लेकर किसी भरोसेमंद पड़ोसी को कॉल कर लेता था।
वह उसके घर जाकर परिजनों से बात करा देते थे। एसटीएफ को कई बार इसके संकेत मिले तो भी वह सिर्फ उस राह चलते शख्स तक पहुंच पाई जिसके नंबर से सुमित ने बात की, लेकिन उससे पहले ही सुमित वह शहर छोड़ देता था। सुमित शुभम शर्मा नाम के फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करता था।