बरेली। बदायूं बिजली निगम के उझानी बिजली उपकेंद्र पर कैशियर के 32.72 लाख रुपये के गबन के मामले में विभागीय जांच शुरू हो गई है। मंगलवार को 5.70 लाख रुपये का स्टेटमेंट मिल गया है, बाकी के स्टेटमेंट का पता नहीं चल सका है। जांच रिपोर्ट एक सप्ताह बाद सौंपी जाएगी।
उझानी बिजली उपकेंद्र पर तकनीशियन विद्युत मुनिंद्र पाल सिंह को राजस्व संग्रह का काम दिया गया था। यह बिल काउंटर का काम देखते थे। जांच में गड़बड़ी मिलने पर सोमवार को विद्युत निगम की तरफ से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसने एक मई 2024 से 16 मार्च 2026 तक विभागीय राजस्व का कुल 32 लाख 72 हजार 313 रुपये की राशि को सरकारी खाते में जमा नहीं किया। आरोप है कि आरोपी कैशियर करीब दो साल से विभागीय धनराशि को खाते में न जमा कर अभिलेखों में हेरफेर जरिए गोलमाल किया। मार्च में जब विभागीय ऑडिट हुआ तो मामले का खुलासा हुआ। जांच के लिए बनाई गई कमेटी में पांच अकाउंट ऑफिसर्स लगाए गए हैं, जिसका नेतृत्व पीके सिंह कर रहे हैं। इनकी तरफ से ही पुराने स्टेटमेंट का मिलान कार्य जारी है।
जांच में 5.70 लाख रुपये स्टेटमेंट का प्रमाण मिला है। राजस्व वसूली में धनराशि जमा है। गबन की धनराशि में से इतना कम हो जाएगा। आगे और भी स्टेटमेंट का मिलान किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में आएगी। - राघवेंद्र कुमार, मुख्य अभियंता, विद्युत वितरण खंड जोन-टू
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जांच में फंस सकते हैं तत्कालीन कुछ अफसर
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी। बिजली उपकेंद्र में करीब 32.72 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। उप लेखाकार मुनिंद पाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होते ही उसे भी सस्पेंड कर दिया गया है। जांच की परतें सही दिशा में खुलीं तो तत्कालीन कुछेक अफसर भी फंस सकते हैं।
गबन का मामला तीन दिन पहले पुलिस रिकॉर्ड में आया। डिवीजन के अधिशासी अभियंता सत्येंद्र प्रकाश गौतम ने ऑडिट के बाद उप लेखाकार मुनिंद्र पाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई तो धीरे-धीरे वरिष्ठ अधिकारी भी हरकत में नजर आने लग गए। तमाम तरह के सवालों के बीच सबसे अहम तो यह कि पिछले साल ऑडिट में पूरा मामला सामने कैसे नहीं आया। इसके पीछे आरोपी को बचाए रखने की साजिश भी हो सकती है। हालांकि आरोपी उप लेखाकार के साथ लेखाकार मुख्य निर्भय सक्सेना को भी सस्पेंड किया जा चुका है। उन्होंने जानकारी में होने के बाद विभाग के आला अधिकारियों को हकीकत से अवगत नहीं कराया था।
दरअसल, गबन दो-चार दिनों का नहीं है। मई- 24 से पिछले सप्ताह तक सबकुछ एक साजिश के तहत हुआ। उप लेखाकार के पास रोजाना आठ- नौ लाख रुपया आता है। अधिकारियों समेत मातहतों को शक न हो, इसलिए बीच-बीच में गबन किया गया।
पुलिस ने शुरू की विवेचना
उप लेखाकार मुनिंद्र पाल के खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कोतवाली में तैनात निरीक्षक (अपराध) राहुल सिंह ने विवेचना शुरू कर दी है। हालांकि अब तक विभागीय स्तर से विवेचक के सामने पक्ष नहीं रखा गया है, लेकिन वह जल्द ही आरोपी के खिलाफ हुई विभागीय जांच रिपोर्ट पर भी गौर करेंगे। आरोपी मुनिंद्र पाल की अधिकारियों से नजदीकियों का भी खुलासा हो सकता है।
मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। टीम की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - चंद्रशेखर, अधीक्षण अभियंता बिजली