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पंचायत चुनाव में सपा की हुई बल्ले-बल्ले

Sat, 06 Feb 2016 11:26 PM IST
बदायूं।
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सपा बदायूं को अपना प्रमुख राजनीतिक गढ़ मानती है। वजह है कि जिले की सहसवान और गुन्नौर सीट से सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव विधायक रहे हैं। लगातार दो बार से उनके भतीजे धर्मेंद्र यादव बदायूं लोकसभा सीट से सांसद हैं। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनावों में सपा को जिले की छह में से चार सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में धर्मेंद्र यादव दूसरी बार विजयी हुए। सूबे में सपा को ऐतिहासिक बहुमत हासिल हुआ था। कहते हैं हवा के साथ सब कुछ ठीक हो जाता है शायद उसी को ध्यान में रखकर कभी सपा से दूरियां रखने वाले जिले के कई कद्दावर नेता भी उसमें शामिल हो गए। चाहे उन्हें प्रधानी, ब्लाक प्रमुख या फिर किसी अन्य पद को हासिल करने का लालच रहा हो। पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद इस चुनावी समर में जो देखने को सामने आया वह यही था कि सत्ता दल से टिकट या फिर समर्थन हासिल करने वाले प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा रही। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव सपा समर्थित प्रत्याशी ज्यादा विजयी हुए। जिले में 1,038 ग्राम पंचायतों में निर्वाचित होने वाले प्रधानों में भी सपा के समर्थित प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा रही। अब जब कि जिले के 15 ब्लाकों के अध्यक्ष के लिए हुए चुनाव में भी सपा को एकतरफा जीत मिली है। 11 प्रत्याशी तो उसके निर्विरोध ब्लाक प्रमुख बन चुके हैं। बाकी चार स्थानों पर भी सपा जीत हासिल करने को जुटी है। पार्टी के बड़े नेताओं को यह उम्मीद है कि बाकी सीटों पर उसके समर्थित प्रत्याशी जीत जाएंगे।
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ब्लाक प्रमुख के चुनाव के बीच ही विधान परिषद सदस्य पद के चुनाव की भी घोषणा हो गई है। सपा ने अपने पूर्व एमएलसी बनवारी सिंह यादव को भी मैदान में उतारा है। चूंकि बाकी कांग्रेस, भाजपा और बसपा के प्रत्याशी अभी घोषित नहीं हुए हैं सो सपा भी इस चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है।
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