किनारे बह रही जीवनदायिनी सोत नदी का अतिक्रमणकारियों ने गला घोट दिया है। बड़े सरकार की शोभा बढ़ाने वाली सोत के पुल के दोनो ओर अतिक्रमण हो गए हैं। अभी भी कुछ भू-माफिया अतिक्रमण करने में जुटे हुए हैं। राजस्व विभाग की टीम जिसे छह माह पूर्व अतिक्रमण हटाने का जिम्मा मिला। यह टीम छिन्न-भिन्न हो गई है। इससे अतिक्रमणकारियों के एक बार फिर हौसले बुलंद हो गए हैं।
छह माह पूर्व नायब तहसीलदार विमल शुक्ला के नेतृत्व में दो कानूनगो और छह लेखपालों की टीम बनाई गई थी। इस टीम को नपत कर सोत नदी पर हो रहे अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। टीम ने शुरूआत में तेजी और उत्साह दिखाया। एक अतिक्रमण को ढहा दिया और तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई। इसके बाद भू-माफियाओं ने पता नहीं कौन सा जादू चलाया कि टीम कहीं से भी एक ईंट भी अतिक्रमण नहीं हटा सकी।
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नायब तहसीलदार के हटते ही छिन्न-भिन्न हुई टीम
टीम के नेतृत्वकर्ता नायब तहसीलदार शुक्ला का स्थानांतरण हो जाने के बाद तो यह टीम ही छिन्न-भिन्न हो गई। किसी भी टीम सदस्य ने एक कदम भी आगे नहीं रखा। उल्टे अतिक्रमणकारियों को अपनी निष्क्रियता का संकेत दे दिया।
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चुनाव में फंसा प्रशासन तो अतिक्रमण शुरू
टीम के बाकी सदस्यों ने अभियान को नकार दिया। इस बीच पंचायत चुनाव में प्रशासन व्यस्त हो गया। अच्छा मौका पाकर भू माफियाओं ने सोत का कई जगह प्रवाह अवरुद्ध कर दिया। कई जगह अतिक्रमण कर लिया तो कई जगह अभी भी अतिक्रमण किया जा रहा है।
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मैं अभी चुनाव में व्यस्त हो गया हूं। चार्ज लेने के बाद एक बार इस संबंध में टीम से पूछताछ की थी। इस टीम का पुनर्गठन कर कार्रवाई की जाएगी। सोत पर किसी कीमत पर अतिक्रमण बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
- ओम प्रकाश, तहसीलदार सदर