डॉ. विजय बहादुर राम। संवाद
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बदायूं। असाध्य रोगों की श्रेणी में शामिल हेपेटाइटिस बी और सी का इलाज अब जिला अस्पताल में मिलेगा। इसके लिए डॉक्टरों और स्टाफ का प्रशिक्षण पूरा हो गया है। जिला अस्पताल प्रशासन ने शासन के लिए दवाओं और जांच उपकरणों को लेकर डिमांड भी भेज दी है। दवाएं मिलने के बाद ओपीडी शुरू हो जाएगी। बाद में इसे विस्तार देकर पृथक विभाग का रूप दिया जाएगा।
हेपेटाइटिस लीवर संबंधी गंभीर बीमारी है। इसका इलाज काफी महंगा है। अब तक मंडल के सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज उपलब्ध नहीं है। गंभीर और जानलेवा इस बीमारी के इलाज के लिए अब तक लोगों को लखनऊ और दिल्ली की दौड़ लगानी होती है। शासन ने अब बदायूं जिला अस्पताल में हेपेटाइटस विभाग को स्वीकृति दे दी है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राजकमल किशोर लखनऊ केजीएमयू से इलाज संबंधी प्रशिक्षण लेकर लौट आए हैं। इसके बाद स्थानीय स्तर पर भी स्टाफ का प्रशिक्षण पूरा हो गया है।
जिला अस्पताल प्रशासन ने हेपेटाइटिस की दवाओं और जांच संबंधी उपकरणों के लिए शासन को डिमांड भेज दी है। दवाएं आने के बाद ओपीडी में क्लीनिक खोल दिया जाएगा। रोगियों की जिला अस्पताल और इसके बाद लखनऊ में जांच कराई जाएगी। हेपेटाइटिस बी या सी की पुष्टि होने पर उनका इलाज शुरू किया जाएगा। बाद में जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस विभाग का विस्तार भी किया जाना प्रस्तावित है।
महंगा इलाज नहीं करा पाते गरीब
फिजीशियन डॉ. राजकमल किशोर ने बताया कि हेपेटाइटिस बीमारी ज्यादातर असुरक्षित यौन संबंध बनाने वालों में, संक्रमित व्यक्ति का रक्त चढ़वाने तथा संक्रमित सिरिंज का इस्तेमाल करने से होती है। लिवर पर बेहद बुरा प्रभाव डालने वाली यह बीमारी वायरस के कारण होती है। हमारे देश में हेपेटाइटिस बहुत आम है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है। हेपेटाइटिस सी भी वायरस से होता है। यह बीमारी लिवर को भी संक्रमित करती है, इसके कारण लीवर में सूजन और जलन पैदा होती है। यह लिवर से जुड़ी बीमारी है। अभी बाजार में केवल हेपेटाइटिस-बी के लिए ओरल (खाने वाली) दवा मिल रही थीं जबकि हेपेटाइटिस-सी का इलाज इंजेक्शन से होता था। अब हेपेटाइटिस-सी की ओरल दवा भी बाजार में है। इस बीमारी की दवाएं महंगी होने के कारण सभी लोग आसानी से इलाज नहीं करा पाते। सरकारी अस्पताल में निशुल्क इलाज और दवाएं मिलेंगी।
गंभीर जानलेवा बीमारी हेपेटाइटिस बी और सी का इलाज जल्द जिला अस्पताल में मिलने लगेगा। शासन से इसके लिए मंजूरी मिल चुकी है। डॉक्टरों और स्टाफ का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। शासन को दवाओं समेत अन्य उपकरणों की डिमांड भेजी जा चुकी है। पहले चरण में जिला अस्पताल की ओपीडी में क्लीनिक शुरू किया जाएगा। इसके बाद इसे विस्तार दिया जाएगा। रोगा की पुष्टि के लिए स्थानीय स्तर के बाद लखनऊ में भी जांच कराई जाएगी। -डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस, जिला अस्पताल