सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का छह महीने से ठप पड़ा काम मार्च में फिर
से गति पकड़ सकता है। दरअसल, प्लांट लगा रही एटूजेड और अकार्डों हाइड्रोएअर
के बीच फंसे पेंच को निपटाने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले दोनों
कंपनियों की जमानत धनराशि जब्त कर ली गई है। अगर कंपनियों के बीच समझौता
नहीं हुआ, तो इस धनराशि से प्लांट का काम पूरा कराया जाएगा। हालांकि बताया
जा रहा है कि दोनों कंपनियां समझौते के प्रयास में हैं।
पब्लिक प्राइवेट
पार्टनरशिप के तहत नगर पंचायत गुलड़िया के पास ग्राम पंचायत उतरना के गांव
सहपुरा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का काम दिसंबर 2012 तक यह काम
पूरा होना था, लेकिन राह में बजट की कमी रोड़ा बन गई। प्लांट लगाने का काम
कंट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज को काम सौंपा गया था।
सीएंडडीसी का प्लांट
लगाने के लिए गुडगांव की कंपनी एटूजेड से करार हुआ था। कुछ दिन काम करने के
बाद एटूजेड ने इसमें अकार्डो हाइड्रोएअर को भी शामिल कर लिया। सरकार ने
अपने हिस्सा की धनराशि 5.78 करोड़ रुपये अगस्त में 2.87 और नवंबर 2013 में
2.91 करोड़ रुपये दो किस्तों में भुगतान कर दी। इसके बाद काम ने जोर पकड़ा,
लेकिन एटूजेड और हाइड्रोएअर के बीच विवाद हो जाने से काम ठप हो गया।
काम
पिछले छह महीने से ठप है। चूंकि काम एटूजेड को सौंपा गया था, तो सीएंडडीसी
ने एटूजेड को नोटिस जारी कर इसकी जमानत धनराशि जब्त कर ली। बाद में एटूजेड
ने अकार्डों को भी पार्टी बनाया। अकार्डों की जमानत धनराशि भी जब्त कर ली
गई। उच्च स्तर पर दोनों कंपनियों के बीच समझौते की कोशिश चल रही है।
सूत्रों ने बताया कि समझौता जल्द हो सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो दोनों
कंपिनयों की जब्त की गई जमानत राशि से मार्च में प्लांट का काम शुरू करा
दिया जाएगा।
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दोनों कंपनियों के बीच समझौते की प्रक्रिया
चल रही है। उम्मीद है कि मार्च से पहले विवाद निपटा लिया जाएगा। अगर ऐसा
नहीं हुआ तो इनकी जब्त जमानत राशि से काम शुरू कराया जाएगा।
-आरएन पांडेय, वरिष्ठ अभियंता (सीएंडडीसी)