कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन पर राह चलते नजर खुद-ब-खुद टिक जाती है। इन्हीं में शामिल हैं, जनाब दिलखुश। सहसवान में अपनी कद-काठी के कारण इन्हें सभी अच्छी तरह से जानते हैं। पेशे से टेलर दिलखुश का नाप लेने का अंदाज भी निराला है, वो जमीन पर लिटाकर नाप लेते हैं। वजह है कि जनाब साढ़े तीन फीट के हैं। कोई कपड़े सिलवाने आता है, तो इस अंदाज में नाप लेना इनकी मजबूरी होती है। ये शेरो-शायरी के लिए भी पहचाने जाते हैं।
दिलखुश सहसवान के मोहल्ला नसरूल्लागंज के रहने वाले हैं। उम्र करीब 57 की है। अकेले ही जिंदगी जीने के अब आदी हो गए हैं। पहले अलीगढ़ में कपडे़ सिलने का काम करते थे। शादी के बारे में बताया कद छोटा होेने के कारण कोई अपनी लड़की की शादी करने को तैयार नहीं होता। एक अर्सा पहले कुछ लोगों ने उनका निकाह भी कराया। बेगम नूरबानों उनसे कद में लंबी थीं। कुछ ही समय बीता था कि बेगम से एक दिन झड़प हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि वह उन्हें छोटे कद का उलाहना देकर चली गईं। फिर लौटकर नहीं आई। तब से वह एकांकी जीवन जी रहे हैं। पेट पालने के लिए सिलाई करते हैं। इस काम में भी उन्हें एक समस्या आती है, वो नाप की। इस कारण तख्त पर लिटाकर नाप लेते हैं। एक लोचा ये भी है कि जिन्हें शर्म आती है, वह दोबारा कपड़े सिलवाने नहीं आते। अब इनके पास पुराने कपड़ों को सिलने का काम ज्यादा आता है।
समस्या ये ही नहीं, छोटा कद होने की वजह से होली या ईद पर लोगों के गले नहीं मिल पाते। जब उनसे पूछा कि सर्कस में काम क्यों नहीं किया? बोले, सर्कस में काम करना उन्हें अच्छा नहीं लगता। सर्कस वाले काला-पीला चेहरा बनाकर फटा बांस देकर मनोरंजन करवाते हैं। दिलखुश शेरो-शायरी के भी शौकीन हैं, लोग उनके पास शायरी सुनने भी आते हैं।