मौसम की मार झेलने के बाद भी रिकार्ड उत्पादन पर पहुंचे सब्जियों के ‘राजा’ आलू निढाल पड़े हैं। कोल्ड स्टोरेज स्वामी भी इनकी बेकदरी में लगे हैं और किसान इनसे छुटकारा चाह रहा है। हर ओर उपेक्षा के शिकार सब्जी के राजा आलू की हालत खस्ता है। जानकारों की मानें तो 15 साल बाद आलू की इतनी दुर्दशा हुई है। आलू ने इस उपेक्षा के बीच अपनी कीमत भी खो दी है।
पिछले साल कम उत्पादन के कारण आलू खेतों में ही बिक रहा था। गत वर्ष किसानों ने सब्जियों के राजा की कीमत आंकी तो सबसे सुपर पाया। यही वजह रही इस बार किसानों का रुख आलू उत्पादन की ओर अधिक दिखा। इस साल के रिकार्ड उत्पादन ने आलू को निचले पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया है। गत वर्ष सात से आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल का भाव गिरकर तीन चार सौ रुपये प्रति क्विंटल पर आकर रुक गया है। इसके और नीचे गिरने के आसार हैं। मौसम के कारण हड़बड़ाए किसान ने एक साथ आलू खोद डाला। आलू व्यापारी भी घबरा गया। आलू व्यापारी का किसानों तक न पहुंचने का असर यह हुआ कि खुद किसान कोल्डस्टोरेज की तरफ दौड़ पड़ा है। इससे वहां लाइनें लग गई हैं। कोल्ड स्टोरेज स्वामी भी नखरे दिखा रहे हैं। किसान परेशान हैं। नीचे गिरे रेटों के कारण उसे लागत भी नहीं मिल पा रही है।
रिकार्ड उत्पादन ने खोई कीमत
आलू की कीमत रिकार्ड उत्पादन ने खो दी है। उद्यान विभाग के अनुसार इस बार आलू का लक्ष्य क्षेत्र 24,000 हेक्टेयर रखा था, लेकिन किसानों ने 25,000 हेक्टेय