कादरचौक में नवरात्रि से पूर्व ग्रामीण परंपरा के तहत सिमरा-सिमरिया के रूप दीवार पर मिट्टी से कला
कादरचौक। नवरात्र से पहले गांवों की दीवारों पर सिमरा (लड़का)- सिमरिया (लड़की) के भित्ति चित्र बनाने का काम शुरू हो गया है। नवरात्र में इन पुतलों की शादी कराई जाएगी। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी गांव में जीवित है। तमाम पक्के मकान बनने के बावजूद इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।
तालाब से चिकनी मिट्टी लाकर उसमें गोबर और भूसा मिलाकर दीवार पर सिमरा-समिरिया के स्वरूप बनाया जा रहा है। इसी के साथ ही चंद्रमा, सूर्य और देवी व देवताओं के साथ वनस्पति, पशु पक्षियों की चित्रकारी भी की जा रही है। बाद में इसमें रंग भरा जाएगा। उसे फूल-पत्तों से सजाया जाएगा। नवरात्र में प्रतिदिन यहां पर पूजा होगी।
शाम को गांव की महिलाएं गीत गाएंगी। गांव में यह एक उत्सव के रूप में होता है। नवमी के दिन सिमरा और सिमरिया की शादी कराई जाएगी। उस दिन मंगल गीत के साथ ही मिठाई बांटकर उनको जल-प्रवाह किया जाता है। इस उत्सव के बाद सहालग का सीजन शुरू हो जाएगा।
गावों के नाम हैं सिमरा-सिमरिया
परंपरा के चलते कादरचौक ब्लाक में दो गांवों का नाम भी सिमरा- सिमरिया पड़ गया है। माना जाता है कि इसी परंपरा के चलते ही बुजुर्गों ने इनके नाम रखे होंगे।