बदायूं। चांदी के दामों में आए रिकॉर्ड उछाल ने मध्यम वर्ग पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। एक साल पहले करीब 95 हजार रुपये प्रति किलो मिलने वाली चांदी अब 2.62 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों के चलते चांदी की पायल, बिछिया और अन्य पारंपरिक आभूषण आम लोगों की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं।
चांदी के दामों का सराफा बाजार में सीधा असर दिखाई दे रहा है। आभूषणों की बिक्री में कमी आई है, जबकि चांदी को निवेश के विकल्प के रूप में खरीदने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सराफा कारोबारियों का कहना है कि अब ग्राहक आभूषण बनवाने के बजाय चांदी के सिक्के लेना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।
चांदी के भाव में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने सराफा बाजार की तस्वीर बदल दी है। जहां एक ओर पारंपरिक आभूषणों की चमक फीकी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर चांदी निवेश के रूप में लोगों को आकर्षित कर रही है।
सराफा व्यापारियों ने जताई अपनी-अपनी
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चांदी के भाव काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले जहां लोग पायल और अन्य हल्के आभूषण आसानी से खरीद लेते थे, अब वही ग्राहक वजन कम कराने या ऐसे आभूषण नहीं खरीद रहे हैं। - दिनेश गुप्ता, व्यापारी
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चांदी मौजूदा हालात में आभूषण से ज्यादा निवेश की धातु बन गई है। ग्राहक मान रहे हैं कि कीमतें और बढ़ सकती हैं, इसलिए वह भविष्य को देखते हुए निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। - प्रमोद गुप्ता, व्यापारी
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चांदी के बढ़ते दामों के कारण आभूषण खरीदना अब आसान नहीं रहा। यदि चांदी लेनी ही है तो निवेश के तौर पर लेना ज्यादा बेहतर लग रहा है। कृष्णा, गुप्ता
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चांदी हमेशा सुरक्षित निवेश मानी जाती है। आभूषण जरूरत के हिसाब से बाद में भी बनवाए जा सकते हैं, लेकिन इस समय निवेश ज्यादा बेहतर लग रहा है। - अनीता शंखधार
दिनेश गुप्ताा।- फोटो : संवाद
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