समाजवादी पार्टी के लखनऊ में चल रहे घमासान पर जिले के सपा कार्यकर्ताओं की शनिवार को पूरे दिन नजर लगी रही। वहीं, सपा कार्यालय पर दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। वहां पर इक्का-दुक्का ग्रामीण तो नजर आए, जो बड़े नेताओं का इंतजार करके लौट गए, लेकिन कोई भी जिला स्तरीय पदाधिकारी उन्हें कार्यालय पर नहीं मिला। जबकि सपा के अधिकांश बड़े पदाधिकारी लखनऊ में ही डटे हुए हैं। सपा का सियासी घमासान थमने के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राहत की सांस ली।
शनिवार को दोपहर करीब सवा दो बजे समाजवादी पार्टी कार्यालय पर अमर उजाला की टीम पहुंची तो वहां पर बैठे चार लोगों ने बताया कि वे लोग यूं ही पार्टी नेताओं से मिलने के लिए आए हैं और किसी के न मिलने पर लौट गए। इधर, जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव समेत पार्टी के मंत्री, विधायक और बड़े पदाधिकारी लखनऊ में रहे। वहां पर पार्टी के हाईकमान के निर्णय के बाद ही आगे की तैयारी करने के बारे में सोच रहे हैं। जिले में मौजूद तमाम सपा पदाधिकारी लखनऊ में गए पदाधिकारियों के नंबर पर कॉल करके जानकारी हासिल करने का प्रयास करते रहे, लेकिन अधिकांश पदाधिकारियों के नंबर स्विच ऑफ या नॉट रीच एवर बताते रहे।
सपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए कई
बदायूं। हाईकमान स्तर पर सपा के घमासान के बीच कई लोगों ने समाजवादी पार्टी छोड़ दी। वे कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ओमकार सिंह ने रहमान खां, नगीन अख्तर, मोहम्मद शहजाद, मोहम्मद अजहर, सलीम, परवनी फारूखी, अदनान पीरजी, जुबैर खां, साबू खां, राशिद कुरैशी, अजहर तुर्क, ताबीज खां, सलमान हुसैन, मोहम्मद शाहिद समेत तमाम लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कराई। इस मौके पर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष शफी अहमद ने कहा कि कांग्रेस विकास की राजनीति करती है।