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Budaun News: एक महीने तक चलने वाला सिद्धपीठ मंगला- माता का मेला शुरू

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वजीरगंज के मंगला देवी माता मंदिर पर मुंडल संस्कार कराता परिवार। संवाद - फोटो : संवाद
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वजीरगंज। आंवला रोड स्थित कस्बे के ऐतिहासिक प्राचीन सिद्धपीठ श्रीराज राजेश्वरी मां मंगला देवी माता मंदिर पर मेला शुरू हो गया है। शनिवार को पूर्व मंत्री एवं सदर विधायक महेशचंद्र गुप्ता ने मुख्य द्वार पर फीता काटकर शुभारंभ किया। यह मेला एक महीने तक चलेगा। हवन-पूजन कर क्षेत्र में शांति और खुशहाली की कामना की गई। हर वर्ष की भांति इस बार भी चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन शनिवार से मेला शुरू हो गया।
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पूर्व में यह मेला जिला पंचायत की देखरेख में लगता था। अब नगर पंचायत की ओर से मेला लगवाया जा रहा है। मेले में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी दुकानदार आते हैं। देवी मां की पूजा-अर्चना-अनुष्ठान के साथ ही लोग बच्चों का मुंडन संस्कार भी करा रहे हैं। मेला में दरी-कालीन, लकड़ी व पत्थर का सामान बहुतायत में आया है। मेला में खेल-तमाशे, सर्कस, झूले, मौत का कुआ, काला जादू आदि लग चुके हैं। व्यवस्थाएं संभालने को नगर पंचायत का कैम्प कार्यालय खुल चुका है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस चौकी, फायर ब्रिगेड और पीएसी के शिविर भी लगाए गए हैं। इस मौके पर अधिशासी अभियंता अखिलेश दीक्षित, भाजपा मंडल अध्यक्ष राघव सिंह चौहान, पूर्व अध्यक्ष अनुज सक्सेना, राजीव वार्ष्णेय, राहुल वार्ष्णेय, राजेश गुप्ता, विपिन सिंह राठौर, अर्जुन सिंह गौर, मनु गुप्ता, जिला पंचायत सदस्य जयपाल सिंह, दिवाकर, वेदपाल सिंह, सभासद रंजीत सिंह, टीनू ठाकुर, ओमकार, विजेन्द्र मौर्या आदि थे।

एक किमी दूरी पर है मेला
नगर से आंवला की ओर जाने वाले मार्ग पर करीब एक किमी दूर टीले पर माता का विशाल और भव्य मंदिर है। मंदिर टीला पर है। माता का दरबार मुख्य सड़क से लगभग 200 मीटर दूर है। सरकारी अभिलेखों में यह जगह गैर आबाद और भवानीगंज के रकबे में दर्ज है। मंदिर प्रवेश के लिए चार द्वार बने हैं। प्राचीन ब्रह्मदेव अर्थात पीपल का वृक्ष भी मंदिर के इतिहास का साक्षी है।
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मान्यता के अनुरूप द्वापर युग का बताते हैं माता मंगला मंंदिर
जनश्रुति के अनुसार मां मंगला देवी की मूर्ति जमीन के गर्भ से उत्पन्न हुई थी। द्वापर युग से यहां देवी प्रतिष्ठित हैं। लोगों की उन पर श्रद्धा है। यहां दर्शन मात्र से लोगों की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। टीले के सुरम्य स्थल पर माता का मंदिर श्रद्धालुओं को अपनी ओर ध्यानाकर्षित करता है। मान्यता है कि साक्षात महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती के प्रतिरूप में मां लोगों की मनोकामना पूर्ण करती हैं।
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