बदायूं। रीसाइकिल वेस्ट मैनेजमेंट फर्म पर रविवार को दोपहर जीएसटी की एसआईबी ने चेकिंग की। व्यापार स्थल पर चेकिंग के दौरान 45 लाख रुपये की कर चोरी सामने आई। व्यापारी ने तीस लाख रुपये जमा किए हैं। बकाया कर ब्याज समेत जांच के बाद जमा कराया जाएगा।
जीएसटी के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन ओपी चौबे ने बताया कि यह फर्म पुराने एयर कंडीशनर, फ्रिज, प्रिंटर, वाशिंग मशीन आदि ई-वेस्ट खरीद कर अपने व्यापार स्थल पर यह फर्म डिस्मेंटलिंग की प्रक्रिया करती है। कॉपर, एल्यूमिनियम, आयरन और प्लास्टिक स्क्रैप निकालकर बिक्री कर देती है। फर्म के डाटा विश्लेषण में कर चोरी का अंदेशा सामने आया। ई-वे बिल में जिन वाहनों का प्रयोग दिखाया गया था उसमें से कुछ वाहनों का मूवमेंट नहीं पाया गया। एसआईबी टीम ने खरीद बिक्री के अभिलेखों और स्टाक की जांच पर लगभग ढाई करोड़ की सप्लाई ऐसी पाई गई, जिस पर फर्म द्वारा ज़ानबूझकर कर अदा नहीं किया गया था। प्रथम दृष्टया लगभग 45 लाख का करपवंचन पाया गया। जांच के अंतिम समय पर व्यापारी ने रुपये 30 लाख रुपये जमा किया गया। जांच के बाद शेष कर, ब्याज समेत जमा कराया जाएगा। जांच टीम में राजीव पांडेय, विकास मिश्रा, प्रवीण माथुर ,वकीउल्लाह आदि विभागीय अधिकारी शामिल रहे।
ऐसे शक के घेरे में आई फर्म
रीसाइकिल वेस्ट मैनेजमेंट फर्म ने बीते साल की तुलना में अप्रैल 2024 तक लगभग 1.5 करोड़ रुपये टैक्स कम दिया गया था। इसी वजह से अधिकारियों का ध्यान फर्म की ओर गया था। दूसरा कारण यह भी था कि वेस्ट मैनेजमेंट की फर्में बड़े शहरों में होती हैं, छोटे शहर में फर्म पंजीकृत कराई और काम किया जा रहा है तो इसके पीछे की वजह क्या है। अधिकारी यह भी जानना चाहते थे।