महाशिवरात्रि पर शहर के मंदिर भव्यता से सजाए गए। शिवभक्तों में भी गजब का उत्साह है। मंदिर कमेटियों के अलावा धार्मिक संगठनों ने गुरुवार को सभी तैयारियां पूर्ण कर लीं। बम-बम भोले के उद्घोष के साथ शुक्रवार की भोर से भगवान भोले नाथ का जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। वहीं हजारों कांवड़ियों ने गंगा से जल भरकर शिवालयों में जलाभिषेक के लिए कूंच कर दिया है।
शहर के प्रसिद्ध गौरी शंकर देवालय में भक्तों की भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए एक दिन पहले ही तैयारियां कर ली गईं। मंदिर की साफ-सफाई के अलावा भव्य सजावट की गई है। फूलों, झालरों से मंदिर को सुसज्जित किया गया है। वहीं, बिरूआबाड़ी मंदिर में भी साज-सज्जा के साथ कांवड़ियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। महिलाओं ने भी घरों में साफ सफाई की। पटना देवकली मंदिर, दरीबा मंदिर, हरप्रसाद मंदिर, नगला, नवाब नौबत राय आदि मंदिरों में व्यवस्थाएं चाकचौबंद कीं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महाशिवरात्रि का पौराणिक महत्व है। भक्तों का मानना है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना, उपवास, जलाभिषेक करने से मनोकामना पूर्ण होती हैं। घर में सुख शांति आती है।
जरीफनगर। बम-बम भोले के उद्घोष के साथ कांवड़ियों ने कूंच किया। हाईवे पर केसरिया रंगों में कांवड़ियों का जत्था गुरुवार को दिन भर आता जाता रहा। जाम की स्थिति भी बनी रही। हाईवे का नजारा भी बदला नजर आया। कांवड़िया सुनील यादव ने बताया कि पांच साल से कांवड़ा ला रहे हैं। वहीं शिवभक्तों ने कांवड़ियों के लिए क्षेत्र में विभिन्न जगह शिविर लगाए गए हैं। संजीव यादव ने बताया कि बदायूं-मेरठ हाईवे पर शिविर में कांवड़ियों को भोजन विश्राम की सुविधा दी जा रही है। वहीं पुलिस व्यवस्था भी रहेगी।
उघैती। कस्बा क्षेत्र के गांव सिद्धबरौलिया के वन में लगने वाला महाशिवरात्रि का प्रचीन मेले की तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। शुक्रवार को सुबह चार बजे से शिवमंदिर में जलाभिषेक होगा। दूर-दूर से कांवड़िया जलाभिषेक के लिए उमड़ेंगे। यहां पर कांवड़िया गाड़ी में डीजे लगाकर व झांकियों के साथ आते हैं। मेले में बड़ा चरख, कालाजादू, मौत का कुंआ, डांस झूला, वैराटी शो, मिठाइयों की दुकान, रासलीला आदि भी शोभा बढ़ाएंगे।
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शुभ मुहूर्त
पंडित ग्रीश के अनुसार प्रात: साढ़े छह से श्रवण नक्षत्र शुरू होंगे, जो शिवरूप है, इसके स्वामी चंद्रमा है, इसलिए साढ़े छह के बाद पूजा शुरू करना ज्यादा शुभदायक होगा।
निषेध:
प्रात: साढे दस बजे से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल है, इस अवधि में पूजा से बचें।
विशेष मुहूर्त
शाम को नौ बजकर 39 मिनट से चतुर्दशी शुरू होगी, तब पूजा का विशेष महत्व होगा।
निशीथकाल-
रात्रिकाल 12 बजकर आठ मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक पूजा शुरू एवं विराम करना शुभ रहेगा।
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शिवजी को यह है पंसद
धतूरा, भांग, बेलपत्र, कमल, मदार का फूल, दूध, दही, घी, शहर बूरा, पंचामृत से जलाभिषेक किया जाता है।
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क्या करें
दोनों मुहूर्त में विधिवत पूजा करें, व्रत में रहें, ब्रह्मचर्य का पालन करें, शिवचालीसा, अन्य स्त्रोत मंत्र, शिवपुराण आदि का पाठ करें, रुद्राभिषेक कराएं।
पूजा वस्तु- चंदन,चावल, धूप, दीप, प्रसाद, फल, फूल, मेवा, मिष्ठान, गंगाजल आदि।