जिला दुग्ध सहकारी समिति निर्मित 30 हजार लीटर दूध की क्षमता वाला करोड़ों की लागत से बनाया गया पराग डेयरी का दुग्ध अवशीतन केंद्र अगस्त 2015 से ऐसा बंद हुआ कि फिर नहीं खुल पाया है। अब तो यह केंद्र खंडहर होकर रह गया है।
चंदौसी रोड पर शहर से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर बने इस प्लांट को फिर से चालू कराने के लिए कोई प्रयास भी होते दिख नहीं रहे। अफसर शासन से बजट न आने की बात कह रहे हैं। यहां प्रशासनिक भवन से लेकर मुख्य द्वार तक ताला ही लगा रहता है। प्लांट में बस एक चौकीदार ही देख रेख करता है। पराग दुग्ध प्लांट में ट्रांसपोर्ट और लैब उपकरण में जंक भी लग चुकी है। नतीजतन, समितियों का दूध सीधे मेरठ भेजा जा रहा है। प्लांट के स्टोर प्रभारी पप्पू यादव ने बताया कि दुग्ध केंद्र पर विद्युत विभाग का लगभग सात लाख बकाया होने के कारण बिजली की आपूर्ति नही हो पा रही है। इससे दुग्ध उत्पादन ठप है। केंद्र फिर से चालू करने के लिए शासन से बजट मांग की जाएगी।
------
डेयरी पर विद्युत विभाग का बिल बकाया होने और ट्रांसपोर्ट तथा कर्मचारियों के वेतन को बजट न होने के कारण प्लांट बंद हो गया। प्लांट चालू करने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं।
-डॉ. डीके वर्मा, जीएम पराग डेयरी