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बटाईदार के हाथ खाली के खाली

Tue, 14 Apr 2015 06:04 PM IST
Bisuli
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जेवर-गिरवी रखकर खेती में लगा दिया। अब बच्चों का पेट कैसे पालें। बटाई पर खेती कर रहे भूरे और सर्वेश की चेहरे पर अब यह दर्द उभर आया है। सरकार ने खेत वाले को तो चेक दे दिया, लेकिन बटाईदार के हाथ तो खाली के खाली रहे।
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समीप के गांव सर्वा निवासी भूरे ने गांव के ही कुलवंत की आठ बीघा खेती बटाई पर ली थी। भूरे मेहनत-मजदूरी कर परिवार पालता है, इसलिए खेत में लगाने के लिए आधे रुपये का इंतजाम भी करना था, सो पत्नी की पायजेब और कुंडल गिरवी रख दिए। मिले तीन हजार रुपये गेहूं की बुआई और खाद में लगा दिए। इसके बाद मेहनत-मजदूरी कर लाई खून पसीना के कमाई से थोड़ा बहुत इकट्ठा हुआ, तो उसका कीटनाशक खरीदकर छिड़काव कर दिया। खेत में लहलहा रही फसल को देखकर भूरे ने तमाम सपने देखे। उसे क्या पता था कि खराब मौसम उसके सपने चूर-चूर कर देगा। बारिश और ओलों ने गेहूं की फसल उजाड़ दी। लेखपाल ने कुलवंत के नाम तो राहत का चेक काट दिया, लेकिन भूरे हाथ खाली रह गए। अब कैसे पत्नी के जेवर छुड़ाकर लाए और कैसे परिवार का पेट पाले? बारिश में कच्चा मकान भी टपकता है। बस, लाचार भूरा अपना पेट मसोस कर ही रह गया है।
यही हाल गांव अजनावर के सर्वेश का है। गांव के ही जंडैल सिंह की पांच बीघा जमीन बटाई पर की थी। सात बच्चे हैं। मेहनत मजदूरी कर किया गया इकट्ठा धन तो गेहूं की फसल में लगा दिया, लेकिन ऊपर वाले ने सारी पसीने की कमाई चौपट कर दी। हर साल सर्वेश बटाई के खेत में पैदा होने वाला गेहूं कुठिया में इकट्ठा कर पूरी साल परिवार का पेट भरता रहा है। अब जेब में फूटी कौड़ी नहीं है और कुठिया खाली रह गई है। जंडैल को तो राहत राशि मिल गई, लेकिन सर्वेश के दर्द का किसी को ख्याल नहीं है। यह महज सर्वेश और भूरे की ही कहानी नहीं है न जाने कितने किसान बटाई पर खेती कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। सरकार के पास ऐसे गरीब किसानों के आंसू पोंछने के लिए कोई योजना नहीं है।
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हरजाना तो खेत के मालिक को ही मिलेगा, लेकिन जो अच्छी सोच के किसान हैं, उन्होंने अपने बटाईदार को भी आर्थिक सहायता बांटी है। - गुलाबंचद, एसडीएम बिसौली
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