बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात स्थायी सीनियर नर्सिंग ऑफिसर एवं नर्सिंग ऑफिसर ने आवास आवंटन में बड़े पैमाने पर हो रही अनियमितता व अवकाश न दिए जाने को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। इस संबंध में कर्मचारियों ने महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, उत्तर प्रदेश लखनऊ को एक विस्तृत प्रार्थना-पत्र भेजकर जांच व आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित होकर आए उन्हें दो वर्ष बीत जाने के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा आवास उपलब्ध नहीं कराया गया। जबकि विभिन्न पदों पर तैनात अन्य कर्मचारी जिनमें संविदा कर्मी, आउटसोर्स स्टाफ और ग्रुप-सी के कर्मचारी शामिल हैं को प्राथमिकता देकर आवास आवंटित कर दिए गए हैं। प्रार्थना-पत्र में उल्लेख किया गया है कि नर्सिंग स्टाफ की सेवा शर्तों के अनुसार उन्हें टाइप-3 आवास दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन वास्तविकता यह है कि उपलब्ध टाइप-3 आवासों पर संविदा चिकित्सक, नर्सिंग फैकल्टी, क्लर्क और फार्मासिस्ट को आवास आवंटित कर दिया गया है। जबकि नियमित सीनियर नर्सिंग ऑफिसरों को आवास के लिए बार-बार प्रार्थना-पत्र देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कर्मचारियों का दावा है कि कई बार लिखित और मौखिक निवेदन करने के बावजूद प्रधानाचार्य कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है।
एसआर हॉस्टल खाली, फिर भी कुछ एसआर को दिए जा रहे टाइप-3 आवास
नर्सिंग स्टाफ ने यह भी बताया कि मेडिकल कॉलेज में एसआर (सीनियर रेज़िडेंट) के लिए अलग हॉस्टल भवन बना हुआ है। लेकिन कई एसआर को वहां रखने के बजाय टाइप-3 आवास दे दिए गए हैं। इसके विपरीत कुछ नियमित नर्सिंग ऑफिसरों को सिर्फ नर्सिंग छात्रावास में एक ही कमरा उपलब्ध कराया गया है, जिसका मानदेय भी उनके वेतन से काटा जाता रहा है। आश्चर्यजनक यह है कि उसी नर्सिंग छात्रावास में संविदा नर्सिंग ट्यूटर और जेआर को बिना किसी मानदेय के रखा गया है, जबकि टाइप-01 आवासों में आउटसोर्स कर्मचारियों को भी बिना शुल्क के आवास दिया गया है।
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नर्सिंग ऑफिसर को नहीं मिल रहे अवकाश
कर्मचारियों ने अवकाश व्यवस्था में भेदभाव के आरोप भी लगाए हैं। प्रार्थना-पत्र में कहा गया है कि
मेडिकल कॉलेज में तैनात क्लर्क, तकनीशियन, फार्मासिस्ट और आउटसोर्स स्टाफ को जीएच (राजपत्रित अवकाश) और आरएच (प्रतिबंधित अवकाश) प्रदान किए जा रहे हैं। लेकिन नियमित सीनियर नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंग ऑफिसर को यह सुविधा नहीं दी जा रही, जबकि वे 24 घंटे अस्पताल सेवाओं में निरंतर ड्यूटी कर रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ के लिए महीने में सिर्फ 5 मासिक अवकाश निर्धारित किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ रहा है।
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इस समय कई आवास अभी निर्माणधीन है। जो आवास उपलब्ध है उसके अनुसार सभी कर्मचारियों को आवंटन किया गया है।
प्राफेसर, डॉ अरूण कुमार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज