यहां बता दें कि बीते दो माह से बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को हर बुधवार के लिए दूध पिलवाने की योजना शुरू की गई। इसके तहत प्रत्येक बच्चे को 200 मिली ग्राम दूध दिया जाए। इस योजना के लागू होने के बाद भी बदायूं जिले में 80 फीसदी स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं पिलवाया जा रहा है। यह हो सकता है कि उनके आंकड़ों में हर बुधवार को बच्चों को दूध पिलवाया जा रहा है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि शासन स्तर को जो शिकायतें भेजी गई उनमें इक बात का खुलासा किया गया कि बच्चों को दूध नहीं पिलवाया जा रहा है। शासन ने इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से लिया है।
इसी क्रम में प्रमुख सचिव आलोक रंजन ने विभागीय अफसरों को जारी निर्देश में कहा है कि बच्चों को हर हाल में दूध पिलवाया जाए। कहा है कि दूध की गुणवत्ता और शुद्धता का भी ध्यान रखा जाए। दूध पिलवाने के करीब दो घंटे बाद बच्चों को भोजन कराया जाए। प्रमुख सचिव ने कहा है कि इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाए। यदि कहीं पर बच्चों को दूध नहीं पिलाने की शिकायतें मिलें तो संबंधित के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा ने बताया कि प्रमुख सचिव के आदेशों का पालन किया जाएगा। सभी खंड शिक्षाधिकारियों को भी इस बात के निर्देश दिए गए हैं कि वह स्कूलों का निरीक्षण कर यह देखें कि बच्चों को दूध पिलवाया गया है अथवा नहीं। या फिर किसी स्कूल में मेन्यू के विपरीत बच्चों को भोजन दिया जा रहा है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।