क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों का बुरा हाल है। लापरवाही इतनी की यहां न तो शिक्षक ही आते हैं और न ही बच्चों को ढंग से शिक्षा मुहैया कराई जाती है। इतना ही नहीं शौचालय टूटे होने के कारण स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे खुले में जाने को मजबूर हैं। न तो शिक्षकों को इसकी परवाह है और न ही विभागीय अधिकारियों को।
अभिभावकों की माने तो यहां मिर्जापुर मौसमपुर का हाल बुरा है। बताते हैं कि यहां शिक्षकों की मनमानी हावी है। वह कभी कभार ही स्कूलों में आते हैं। बच्चे पूरे दिन इंतजार करने के बाद अपने घर को लौट जाते हैं। वहीं प्राइमरी व जूनियर खिरकवाड़ी भूड़ का भी यहीं हाल है। यहां गंदगी का अंबार होने के साथ शौचालय टूटे पड़े हैं। अभिभावक बताते हैं कि बच्चों को खुले में जाना पड़ता है। कहते हैं कि उन्होंने कई बार विभागीय अफसरों के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों से भी शिकायत की है। बावजूद इसके सुधार नहीं किया गया। हाल यह है कि आज भी यहां अव्यवस्थाएं हावीं हैं।