फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सांठगांठ कर चलवाए जा रहे बिना मान्यता के स्कूल

विज्ञापन
विज्ञापन
बदायूं। शिक्षा विभाग में शासन के निर्देश, डीएम के आदेश भी कोई मायने नहीं रखते हैं। यही वजह है कि जिले में बिना मान्यता के कई स्कूल संचालित हो रहे हैं। अधिकारी इन निर्देशों को हवा में उड़ा रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि ऐसे स्कूल संचालकों को इन अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।
विज्ञापन

शासन के साफ निर्देश हैं कि बिना मान्यता कोई भी स्कूल किसी भी सूरत में नहीं चलना चाहिए। डीएम दिनेश कुमार सिंह ने भी विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया था कि वह बिना मान्यता के स्कूलों को बंद कराए। उनकी दीवारों पर बड़ा-बड़ा लिखवाया जाए कि वह बिना मान्यता प्राप्त (फर्जी) स्कूल हैं। गांव के लोगों को बुलाकर इसकी जानकारी दी जाए, साथ ही उस विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का एडमिशन गांव के ही सरकारी विद्यालय में कराया जाए। स्कूल संचालकों के खिलाफ एफआईआर कराई जाए, लेकिन ऐसे स्कूल संचालकों को विभागीय अधिकारियों का खुला संरक्षण मिला हुआ है। यही वजह है कि शासन प्रशासन के आदेश को लगातार अनदेखा किया जा रहा है।
बीईओ ने नहीं माना बीएसए का आदेश
- छह जुलाई को निरीक्षण के दौरान बीएसए ने ब्लॉक जगत के गांव फतेहपुर में बगैर मान्यता के एक स्कूल को चलते हुए पाया। कमरे भी छोटे थे और प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं थी। विद्यालय में कार्यरत स्टाफ भी अप्रिशिक्षित था। बीएसए ने बीईओ जगत को निर्देशित किया था कि वह विद्यालय संचालक के विरुद्ध एफआईआर कराकर जुर्माना वसूली की कार्रवाई करें, लेकिन बीईओ ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
विज्ञापन

मैंने सभी बीईओ को निर्देश दिए थे कि वह अपने क्षेत्र में चल रहे फर्जी स्कूलों को बंद कराएं और एफआईआर दर्ज कराएं। शनिवार को जगत ब्लॉक में एक स्कूल बिना मान्यता के चलता मिला था, उसे बंद कराया था, साथ ही बीईओ जगत को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। यदि उन्होंने कार्रवाई नहीं की है तो इसके बारे में उनसे पूछा जाएगा।
विज्ञापन

-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें