बदायूं। शासन की सख्ती के बावजूद माफिया शिक्षा की दुकानें चला रहे हैं। उन्हें ने कानून का डर है और न बच्चों के भविष्य की चिंता। जिले के बड़े अधिकारी आदेश देकर भूल जाते हैं और उनके आदेश का नीचे वाले पालन नहीं करते। मतलब साठगांठ के चलते शिक्षा के क्षेत्र में सब घालमेल चल रहा है।
पिछले दिनों शासन ने बगैर मान्यता वाले स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था। साथ ही फर्जी स्कूल चलाने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा गया था। शासनादेश आने के बाद डीएम दिनेश कुमार सिंह ने बीएसए और डीआईओएस को फर्जी स्कूल चिह्नित कर संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। साथ ही नियमानुसार रिकवरी के लिए भी कहा था। बीएसए ने जिले के सभी बीईओ को अपने क्षेत्र में चल रहे बिना मान्यता के स्कूलों की लिस्ट बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जुलाई के पहले सप्ताह में बीईओ ने फर्जी स्कूलों के खिलाफ छापामारी अभियान चलाया था। शुरू में फर्जी स्कूलों वाले घबराए थे। लोगों को भी लगा था कि इस बार बिना मान्यता वाले स्कूल बंद हो जाएंगे, लेकिन बाद में हालात पहले जैसे रहे। शासनादेश का डर दिखाकर बीईओ ने फर्जी स्कूल स्कूल संचालकों को पहले जमकर हड़काया फिर उनसे साठगांठ कर ली।
दबतोरी इलाके चल रहे कई फर्जी स्कूल
दबतोरी। लक्ष्मीपुर आबादी के हिसाब से आसफपुर ब्लाक का सबसे बड़ा गांव है, जिसमें लगभग नौ हजार मतदाता हैं। यहां दो प्राथमिक और दो उच्च प्राथमिक स्कूल हैं, जिसमें एक कन्या जूनियर हाईस्कूल है। बावजूद इसके क्षेत्र में कई बिना मान्यता के कई स्कूल चल रहे हैं।
ये है सरकारी स्कूलों के आंकड़े
- प्राथमिक विद्यालय-1802
- उच्च प्राथमिक विद्यालय-656
- कुल बच्चे- दो लाख 94 हजार
सभी बीईओ को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्र के सभी स्कूलों को चेक करें। ताकि पता चल सके कि कौन से स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। अगर कोई ऐसा स्कूल है तो विधिक प्रक्रिया के तहत उसके संचालक पर कार्रवाई की जाए।
- रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
डीआईओएस और बीएसए को निर्देशित किया है कि बिना मान्यता कोई भी स्कूल नहीं चलना चाहिए। जो भी स्कूल बिना मान्यता का चलता मिले, उसके खिलाफ तुरंत ही कार्रवाई की जाए।
- दिनेश कुुमार, डीएम