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गौरेया एक पक्षी नहीं पर्यावरण की सच्ची मित्र

Sun, 20 Mar 2016 09:41 AM IST
बदायूं।
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मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ.वीके शर्मा ने कहा कि गौरैया की घटती संख्या इस बात का प्रमाण है कि पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है। इस पर सभी को गंभीरतापूर्वक विचार करना होगा। विशिष्ट अतिथि वन क्षेत्राधिकारी सतेंद्र कुमार ने सरकारी स्तर पर गोरैया संरक्षण के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी। कहा कि समय की मांग है कि हम सब मिलकर गोरैया का संरक्षण करें। कार्यक्रम संयोजक इको क्लब प्रभारी डॉ. शैलेंद्र कबीर ने कहा कि गोरैया पर्यावरण की सच्ची मित्र है। खेती को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को समाप्त करने वाली यह चिड़िया प्रदूषण के कारण खुद समाप्त होने के कगार पर है। पृथ्वी पर जितना अधिकार मनुष्य का है, उतना ही इन जीव-जंतुओं का। इनका संरक्षण सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. रिजायउद्दीन सिद्दीकी ने गोरैया संरक्षण के लिए जन-जागरण की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ.वीएन शुक्ल ने पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से पशु-पक्षी संरक्षण की बात कही। संगोष्ठी में डॉ.एमएम फरशोरी, डॉ.सुधाकर आशावादी, डॉ.आरके शर्मा,  विजय शंखधार, रामानंद मिश्र, डॉ.रचना राठौर, डॉ.शाहीन बी रिजवी, डॉ.अमित वैश्य, डॉ.कमल सिंह, डॉ. कुमुद रंजन, डॉ. रूपम सक्सेना, डॉ.मधु शर्मा, कुमारी दिशा मौजूद रहीं।
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बदायूं। गोरैया संरक्षण की आवश्यकता शीर्षक पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में सुमायला रूही प्रथम, सबा नरू द्वितीय, अवनीश तृतीय स्थान पर रहे। वाद-विवाद प्रतियोगिता में शुमायला रूही प्रथम, रुचि द्वितीय और अवनीश तृतीय रहे। निबंध प्रतियोगिता में भी शुमायला रूही प्रथम रही, जबकि रुप चंद्र, अवनीश कुमार द्वितीय और राहुल कुमार तृतीय रहे। सभी को पुरस्कृत किया गया। इनके अलावा विशेष सहयोग के लिए डॉली शर्मा, शिवम भारद्वाज, अनिल कुमार, ज्ञानेंद्र सिंह यादव, नवीन कुमार शर्मा को भी भी पुरस्कृत किया गया।
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