हजारों की संख्या में पहुंचे शिक्षामित्रों ने सरकार से की अध्यादेश लाने की मांग
तीन दिन तक लगातार चलेगा आंदोलन, मांग पूरी नहीं हुई तो किसी भी हद तक जा सकते हैं शिक्षामित्र
फैसला न होने तक अपनाया जाए समान वेतन-समान कार्य का फार्मूला
समायोजन रद्द होने से नाराज जिले भर के शिक्षामित्रों ने बृहस्पतिवार को जिला बेसिक अधिकारी कार्यालय पर सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। हजारों की संख्या में धरना-प्रदर्शन में मौजूद शिक्षामित्रों ने एलान किया है कि जब तक उन्हें शिक्षक के पद पर वापस नहीं लिया जाता है तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। तीन दिन तक लगातार ये सत्याग्रह चलेगा। आंदोलनकारी शिक्षामित्रों ने अपनी मांग को पूरा कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को संबोधित ज्ञापन बीएसए को दिया। शिक्षामित्रों ने जमकर नारेबाजी की।
यहां बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सहायक अध्यापक पद पर हुए शिक्षामित्रों के समायोजन को रद्द कर दिया था। तब से शिक्षामित्रों में काफी निराशा है। समायोजन रद्द होने के बाद से ही वे आंदोलन की राह पर चल रहे हैं। बीते दिनों प्रदेश सरकार ने उन्हें 15 दिन के अंदर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था। तब शिक्षामित्रों ने अपने आंदोलन को स्थगित कर दिया था। सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी। सो प्रांतीय आह्वान पर शिक्षामित्रों ने गुरुवार से सत्याग्रह आंदोलन शुरु कर दिया। जिले भर के हजारों शिक्षामित्र बीएसए कार्यालय पर सुबह से ही पहुंचने शुरू हो गए थे। दोपहर 12 बजे तक बीएसए कार्यालय परिसर भर गया।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांग को पूरा नहीं किया तो यह आंदोलन और तेज किया जाएगा। आज से 19 अगस्त तक यह सत्याग्रह आंदोलन दिन-रात चलेगा। बोले-मांगों को पूरा कराने के लिए शिक्षामित्र किसी भी हद तक जा सकते हैं। वक्ताओं ने कहा कि सरकार अध्यादेश लाकर उनके समायोजन को बचाए। तब तक समान कार्य-समान वेतन का फार्मूला अपनाए। उन्होंने कहा कि समायोजन रद्द होने के बाद प्रदेश में हमारे कई साथियों की जान चली गई है। सभी के परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसलिए सरकार को जल्द ही उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उचित फैसला करना चाहिए। सभी ने एक स्वर से मांग को पूरा करने को कहा। जमकर नारेबाजी की। धरना-प्रदर्शन में मृदुलेश यादव, निर्भान सिंह यादव, मनोज यादव,रावेंद्र सिंह यादव, अमित शर्मा, दिनेश चौधरी, अमित गुप्ता, बाबू खां, राजीव कुमार सिंह, मोहम्मद जिलानी, फूलबानो, सत्यवती, जयप्रकाश, अनेक पाल, अजमल अली, संजीव यादव, शिब्ते अली, चरन सिंह, वर्षा भारती, लक्ष्मण यादव, जहीरुल इस्लाम, सुनील कुमार, धर्मपाल सिंह, अनूप सिंह, पूनम, रंजीत सिंह, अजयवीर, कुंवरपाल, मुकेश आदि थे। --
बड़ी संख्या में पहुंचीं महिला शिक्षामित्र
बदायूं। समायोजन रद्द होने के बाद शुरू हुए आंदोलन में आज भी महिला शिक्षामित्रों की संख्या काफी रही। कई महिला शिक्षामित्र अपने छोटे बच्चों के साथ धरना-प्रदर्शन में पहुंचीं।
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पुलिस लाइंस पर रही जाम की स्थिति
बदायूं। हजारों की संख्या में शिक्षामित्रों के बीएसए कार्यालय पर आने से पुलिस लाइंस चौराहे पर कई दफा जाम की स्थिति रही। हालांकि चौराहे पर तैनात पुलिस कर्मियों ने वाहनों को रुकने नहीं दिया। फिर भी देर शाम तक पुलिस को पूरी मुस्तैदी के साथ रहना पड़ा।
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बेटी की कैसे हो शादी: कुसुमलता
धरना प्रदर्शन में दातागंज की रहने वाली एक विधवा शिक्षामित्र कुसुम लता पहुंची थी। वह समायोजन रद्द् होने की बात कहते हुए फफक पड़ी। कुसुमलता का कहना था कि सरकार ने नौकरी छीनकर बेरोजगार कर दिया। आने वाले समय में परिवार पर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। घर में दो जवान बेटियां हैं उनकी शादी होनी है। बड़ी बेटी जिले से बाहर पढ़ाई कर रहीं थी नौकरी जाने के सदमे में वह घर लौट आई। सुप्रीम कोर्ट के अचानक के इस फैसले से परिवार पर संकट खड़ा हो गया है। बच्चों का भविष्य बेकार होने की कगार पर है। दोनों लड़कियां घर पर है परिवार की स्थिति बेहद खराब है। एक महीने से घर में खाने पीने की उचित व्यवस्था नहीं हो रही है।
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कैसे चलेगा खर्चा: नीतू सिरोही
बदायूं की रहने वाली महिला शिक्षा मित्र नीतू सिरोही ने बताया कि समायोजन रद्द होने से परिवार पर संकट छा गया है। लगातार सरकार शिक्षामित्रों के हित की बात कहकर आश्वासन दे रही है, लेकिन कर कुछ नहीं रही है। नीतू ने यह भी बताया कि कांवेंट स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की फीस जमा नहीं हो पा रही है। बच्चों का भविष्य अगर खराब हुआ तो वह हर हद तक गुजर जाएंगे। शिक्षामित्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूरी होंगे।
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कब होगी शिक्षक पद पर वापसी: नीतू राठौर
बदायूं के रहने वाली शिक्षा मित्र नीतू राठौर ने कहा कि समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्रों का सम्मान छिन गया है। कल तक जो हमारा कहना करते थे अब वे हमें नहीं पूछते। सरकार के आश्वासन के बाद शिक्षामित्रों ने स्कूल जाना शुरू किया लेकिन सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरी आखिरकार धरना प्रदर्शन करना पड़ा। अगर सरकार सम्मान वापस नहीं कर सकती तो कम से कम शिक्षा मित्रों को पुन: शिक्षक पद पर नियुक्त करें।
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शादी का रिश्ता टालने का मजबूर: लता
धरना प्रदर्शन में शामिल होने समरेर से पहुंची शिक्षामित्र लता ने बताया कि उसकी बेटियां शादी योग्य हो गई है। नौकरी जाने के बाद से परिवार में गरीबी और संकट छा गया है। बड़ी बेटी के शादी के रिश्ते आते रहते है, लेकिन बजट के अभाव में रिश्ता टालना पड़ता है। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि अब शादी के लिए किसी से जिक्र तक नहीं कर पाते। शिक्षक पद पर दोबारा समायोजन नहीं हुआ तो आने वाले समय में परिवार की स्थिति और बिगड़ जाएगी।