दो सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा से जिले की राजनीति गरमाई
पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह यादव के बेटे हैं अवनेश यादव
पंचायत की राजनीति से निकलकर आए हैं उदयवीर शाक्य
पिछले विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर अपने प्रत्याशी न जिता पाने वाली समाजवादी पार्टी ने इस बार सबसे पहले उन्हीं सीटों पर प्रत्याशी की घोषणा की है। पार्टी ने इस बार हारी सीटों पर नए चेहरों को उतारा हैं। हालांकि ये नाम राजनीति में पुराने में लेकिन विधानसभा चुनाव के लिए इन्हें पहली बार टिकट दिया जा रहा है। खास बात यह है कि पार्टी ने एक सीट पर जातिगत आंकड़ों का ध्यान रखा है तो दूसरे पर नहीं।
लगभग तीन लाख की मतदाताओं वाली दोनो विधान सभाओं में सपा के प्रत्याशी घोषित होने के बाद राजनतिक तापमान बढ़ गया है। प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद विपक्षी दलों में हलचल बढ़ी है, वहीं पार्टी के अंदर भी खींचतान मच गई है। दोनों स्थानों पर जातिगत आंकड़ों के आधार पर अपना दावा मजबूत समझ कर रहे कुछ नेताओं को निराशा हाथ लगी है और वह अपने आकाओं की शरण में जाने की तैयारी करने लगे हैं। पार्टी ने करीब तीन महीने पहले इन सीटों पर चुनाव लड़ने वाले दावेदारों का इंटरव्यू लिया था। माना जा रहा है कि उस समय बनाए गए पैनल के आधार पर ही प्रत्याशियों की घोषणा की गई है।
2012 के विधानसभा चुनावों में बिल्सी और दातागंज सीट पर सपा प्रत्याशियों को हार झेलनी पड़ी थी। पार्टी ने इस बार बिल्सी से उदयवीर सिंह शाक्य और दातागंज में अवनेश सिंह यादव को प्रत्याशी घोषित किया है। हालांकि चेहरे दोनों नए हैं लेकिन राजनीति से संबंध पुराना रहा है। अवनेश पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह यादव के बेेटे हैं और माना जा रहा है कि पार्टी ने उनके अनुभव और वोट बैंक का ध्यान रखकर अवनेश को टिकट दिया है। उदयवीर पंचायत की राजनीति से आगे आए हैं।
बिल्सी में शाक्य बिरादरी पर दांव
बिल्सी विधान सभा से अजमल खान, सुरेशपाल सिंह चौहान, मुश्ताक हुसैन और रजनीश गुप्ता ने भी आवेदन किया था। इस सीट से पिछले चुनाव में हार गए सपा प्रत्याशी पूर्व राज्यमंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल उर्फ पप्पी भैया ने आवेदन ही नहीं किया था। बता दें, इस विधान सभा के जातिगत आंकड़ों के आधार सबसे ऊपर अनुसूचित जाति, फिर ठाकुर, उसके बाद मुस्लिम और चौथे नंबर पर वैश्य हैं। शाक्य, सैनी, मौर्य, कश्यप बिरादी को मिलाकर इस सूची में पांचवां स्थान पर रखा जाता है। यानी पार्टी ने मुस्लिम, बनिया और एक ठाकुर प्रत्याशी के बजाए शाक्य बिरादरी पर दांव लगाया है। ऐसे में पार्टी में इसे लेकर घमासान और अंदरूनी विरोध की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उदयवीर सिंह शाक्य को साफ के चलते टिकट मिला है। हालांकि वह तीन बार जिला पंचायत का चुनाव हार चुके हैं। एक बार ब्लाक प्रमुखी चुनाव एक मत से हार गए थे। उदयवीर के भाई देशराज सिंह और भाभी लज्जावती हैदलपुर से प्रधान रह चुकी हैं। नए परिसीमन में अब रायपुर मजरा पंचायत से उनकी पत्नी विद्योत्तमा प्रधान हैं।
दातागंज में प्रेमपाल और बिरादरी पर भरोसा
दातागंज विधान सभा से पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह यादव, उनके पुत्र अवनेश के अलावा अलावा कैप्टन अर्जुन सिंह यादव और डॉ. शैलेष पाठक ने आवेदन दिया था। यहां जातिगत संख्या के अनुसार ठाकुर, यादव और फिर कश्यप मतदाताओं का क्रम माना जाता है। ऐसे में यादव बिरादरी और प्रेमपाल के अनुभव पर दांव खेला गया। यहां पार्टी को लोकसभा चुनाव में तीन बार और विधानसभा चुनाव में दो बार करारी शिकस्त मिली है। हालांकि कैप्टन अर्जुन सिंह भी आश्वस्त थे लेकिन उन्हें निराशा मिली। माना जा रहा याद बिरादरी के साथ पार्टी ने पूर्व विधायक प्रेमपाल पर अधिक भरोसा जताया। प्रेमपाल के बेटे अवनेश कुमार सिंह पिछली बार समरेर से ब्लाक प्रमुख बने थे, तब से उनकी राजनीति पेंग बढ़ी। इस उनकी पत्नी शशिप्रभा यादव ब्लाक प्रमुख हैं। ऐसे में प्रेमपाल की छत्रछाया में अवनेश की उपयोगिता अधिक मानी गई।
पार्टी ने टिकट घोषणा में उनकी राय नहीं ली है लेकिन पार्टी हाईकमान के फैसले पर उन्हें ही चुनाव लड़ाना है। मैं इससे अलग नहीं जा सकता।
- बनवारी सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा