जिले में किसान त्राहि-त्राहि कर रहा है। बचीखुची फसल को कहा ले जाए। आढ़तिया इतरा रहे हैं, खरीद के नाम नाम पर भौहें चढ़ा रहे हैं। परेशान किसान इनके हाथ भी लुटने को मजबूर है। लेकिन शासन का वह आदेश अभी तक जिले को नहीं मिला है, जिसमें सरकारी खरीद केंद्रों पर कुछ हद तक खराब गेहूं भी बेचा जा चुके। किसान परेशान है कि आखिर कब आएगा ऐसा आदेश जो लुट-पिटे किसान को राहत भरा साबित हो। किसान इंतजार तपिस में झुलस रहा है।
जिले में बारिश, तेज हवा और ओले की मार से पीड़ित किसानों को लगा कि उनका दर्द कौन बांट पाएगा। कोई साथ नहीं देगा तो उसने आत्महत्याएं कीं। कइयों का दिल बैठ गया। जिले में 35 किसान मौत के गाल में समा गए। इसके बावजूद भी तो व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। किसानों के हितों के लिए सरकारी क्रय केंद्रों पर पीला, सिकुड़ा और कुछ हद तक खराब गेहूं खरीद को शासन स्तर से राहत मिली तो इस संबंध में पिछले चार दिन हो गए। आदेश जिले को नहीं पहुंचा है। किसान की मुसीबत को समझने में कोई अपना समय नहीं देना चाहता। एक आदेश जो इस समय किसानों की सूखे हलक को पानी की बूंद के समान होता, वह भी इंतजार में फंस गया है।
नहीं खुले हैं अभी भी 50 खरीद केंद्र
जिला मुख्यालय पर बनाई गई रणनीति को नीचे के कर्मचारी फेल किए हुए हैं। जिले में सात संस्थाओं को गेहूं खरीद की जिम्मेदारी दी गई है। इन संस्थाओं ने काफी शिथिलता से काम शुरू किया। यही वजह रही है कि गेहूं खरीद बेहद कम हो रही है। 62000 मीट्रिक टन खरीद के लक्ष्य के सापेक्ष जिले में मात्र 8,389 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो सकी है, जबकि किसान गेहूं लगभग निकाल चुका है। उसका खराब गेहूं सरकारी क्रय केंद्र नहीं ले रहा है, इसलिए वह उसे बहुत कम दामों पर ही बेचने कोे मजबूर है। सबसे अहम मुद्दा है गेहूं क्रय केंद्र खुलने का। यहां बता दें कि पीसीएस जैसी दागी संस्था को 45 क्रय केंद्र दिए गए हैं। इससे सबसे ज्यादा क्रय केंद्र निष्क्रिय पड़े हुए हैं। शिकायतें हैं कि जिले में 114 गेहूं क्रय केंद्रों में से 50 केंद्र सक्रिय ही नहीं हो सके हैं।
50 प्रतिशत तक खराब गेहूं खरीद के संबंध में आदेश की प्रतीक्षा है। सभी गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन होगा। कहीं भी कोई केंद्र संचालित नहीं है। उसके बारे में जानकारी कराई जा रही है। निष्क्रिय क्रय केंद्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सभी केंद्र प्रभारियों को बता दिया गया है कि किसानों के साथ ठीक व्यवहार करें और किसानों के लिए सभी व्यवस्थाएं केंद्र पर लागू रखें। अन्यथा केंद्र प्रभारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। - आरपी यादव, एडीएम वित्त/ प्रभारी अधिकारी गेहूं खरीद