डीएम ने जलस्रोतों पर चिंता व्यक्त करते हुए रिपोर्ट तलब की
अमर उजाला के अभियान का असर, डीएम ने तहसीलदारों को लगाया
जिलाधिकारी सीपी त्रिपाठी ने विलुप्त होती जा रही नदियों के प्रति संजीदा दिखाई दिए। उन्होंने जिले की सूख रही नदियों और तालाबों को पुर्नजीवित कराने के उद्देश्य से संबंधित क्षेत्रों के उप जिलाधिकारियों को चिह्नांकन कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा जल के अन्य स्रोतों के बारे में भी मौजूदा हालात की रिपोर्ट भी तलब की है।
अमर उजाला ने 'जल है तो कल है' स्लोगन के तहत सिमट रहे तालाबों और सिकुड़ती-सूखती जा रही नदियों को इंगित करते हुए अभियान चलाया। इस अभियान के तहत जल संकट की ओर बढ़ रहे कदमों की आहट को उजागर किया था। जिले की सोत, महावा, अरिल, भैंसोर नदियों के सूखने से बने हालात और रामगंगा की स्थिति पर लगातार खबरें प्रकाशित की थीं। इसका परिणाम है कि जिलाधिकारी नदी-तालाबों के सूखने पर गंभीर दिखाई दिए। शुक्रवार को उन्होंने सभी एसडीएम और तहसीलदारों से अपने-अपने क्षेत्रों की नदियों और प्रमुख तालाबों के बारे में मालूमात की। उन्होंने मातहतों से कहा कि सभी नदियों को चिन्हांकन कर वहां अतिक्रमण के बारे में भी फीडबैक लें। उन्होंने कहा कि नदियों का पुनर्जीवन बहुत जरूरी है। इसके उपाय जुटाने को भी राय मशविरा लिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा है कि तहसीलवार किन-किन तालाबों से अवैध कब्जा हटवाकर खोदाई कराई गई है? रिपोर्ट तैयार कर उन्हें जल्द उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने इसके लिए 20 जून तक का समय भी निर्धारित कर दिया। कहा कि सभी एसडीएम इस कार्य में गंभीरता से लगकर पूरी रिपोर्ट तैयार कर उन्हें अवगत कराएं।
तालाबों के आवंटन की प्रक्रिया को परखा
बदायूं। जिलाधिकारी ने मत्स्य पालन के लिए तालाबों के आवंटन, कृषि भूमि आवंटन, कृषक दुर्घटना बीमा योजना, खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदन पत्रों के डाटा-फीडिंग और ऑनलाइन प्राप्त होने वाले शिकायती पत्रों के निस्तारण की गहन समीक्षा की।