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सोत की धारा को पार रने के लिए लेना पड़ता था नाव का सहारा

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बिल्सी। क्षेत्र में कभी अपनी निर्मल धारा के रूप में पहचान रखने वाली सोत नदी वर्तमान में अपना मूल रूप को खो चुकी है। बिल्सी तहसील क्षेत्र के गांव ओया के लोगों ने बताया कि अब से करीब बीस वर्ष पहले सोत नदी बरसात के दिनों में कभी-कभी विकराल रूप भी धारण कर लेेती थी और यहां बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती थी। धीरे-धीरे सोत नदी के प्रमुख स्रोत ही बंद होते गए, जिससे उसमें पानी की धारा भी बहना बंद होती गई। लोगों का यह भी कहना है कि इस नदी की धारा पार करने के लिए लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ता था।
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गांव के लोग बताते हैं कि गांव के पास एक कोई विशाल स्रोत भी नदी में मौजूद था। जब बरसात होने पर इसमें पानी का बहाव बढ़ता था, तो इस स्रोत के निकट एक भंवर जैसा बन जाता था। उसे देखने के लिए आसपास के ग्रामीणों की भीड़ लग जाती थी। ग्रामीणों के मुताबिक सोत नदी का पानी का शुद्ध एवं स्वच्छ था, जिसे लोग पीने तक में प्रयोग कर लेते थे, साथ ही क्षेत्र के किसानों के लिए तो यह नदी वरदान साबित होती थी, क्योंकि उस वक्त सिंचाई के सीमित साधन थे। किसान नदी के पानी को पल्लों से खींच कर खेतों की सिंचाई करते थे, लेकिन धीरे-धीरे बरसात भी कम होती गई और सोत नदी के स्रोत बंद होने से इसमें पानी की धारा भी बहना बंद हो गई। अब नदी सूखी पड़ी हुई है, जिसके अधिकतर भाग पर लोग कब्जे करके खेती कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक बार फिर नदी के पुनर्जीवन के लिए प्रयास होने चाहिए, ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके।

बोले लोग-
- अब से बीस वर्ष पहले सोत नदी अविरल धारा के साथ क्षेत्र में बहती थी। क्षेत्र के लोग इसके पानी को पीने के साथ-साथ सिंचाई के प्रयोग में लाते थे, लेकिन समय के साथ सब कुछ बदल गया। अब न तो सोत नदी में पानी आता है और न ही उतनी बरसात होती है। इस कारण अब किसानों को सिंचाई के लिए काफी दिक्कत उठानी पड़ती है।
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उदयभान सिंह, ग्रामप्रधान ओया
वर्तमान में सोत नदी अधिकतर जगहों पर नाले एवं खेतों में मिल चुकी है। कहीं-कहीं तो यह स्थिति है कि यह नदी बिल्कुल गायब ही दिखती है। बरसात के दिनों में इस नदी को पार करने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता था, मगर अब वह दृश्य देखने को नहीं मिलता है।
शिव कुमार सिंह, ओया
सोत में गांव के निकट एक ऐसा स्रोत मौजूद था, जिसमें नदी का पानी गोल चक्कर के साथ नीचे जाता था। इसे देखने के लिए आसपास के लोग यहां आते थे। नदी के सूखने के साथ ही क्षेत्र में हरियाली भी काफी कम हो गई है, क्योंकि नदी में जब से पानी आना बंद हुआ है, तब से नदी के किनारे होने वाली हरियाली भी गायब हो गई है।
ओमवीर सिंह, ओया
यदि प्रदेश सरकार नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास करे तो इसमें फिर से पानी की धारा बह सकती है। इससे क्षेत्र के किसानों का सिंचाई का बेहतर साधन मिल सकेगा, साथ ही किसानों की फसलें कम लागत में पैदा हो सकेंगी। इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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ओमकार सिंह, ओया
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