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कभी सोत में लोग करते थे स्नान, आज चरागाह बन गई नदी

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बिसौली। एक जमाना था जब नगर व सोत नदी के किनारे बसे गांवों के युवा और बच्चे सदानीरा में स्नान किया करते थे। चरवाहे पशुओं को नहलाने के लिए नदी पर आते थे। आज उसी बहती सोत नदी के पास बहाने के नाम पर खुद के आंसू भी नहीं हैं। चरागाह बन चुकी सदानीरा चुपचाप सीने पर हर रोज बनते जख्मों को असहाय रूप से देख रही है।
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बिसौली में सोत नदी की हालत की हालत ज्यादा खस्ता है। जनपद में चूंकि यह नदी यहीं से प्रवेश करती है, इसलिए इसकी हालत यहां पर ज्यादा विचारणीय हो जाती है। बिसौली क्षेत्र के गांव रायपुर, न्योली हरनाथपुर, खुर्रमपुर भमोरी, में नदी की हालत ये है कि यहां ग्रामीण इसे चरागाह के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। इन गांवों के दर्जनों किसानों के सैकड़ों पशु यहां चरने आते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि जैसे जैसे नदी सूखती गई तो खेती तो होने ही लगी, ग्रामीणों ने इसे अपने जानवर चराने के लिए भी उपयोग करना शुरू कर दिया। अब यहां घास खड़ी है तो सैकड़ों जानवर यहां विचरते रहते हैं।
लगभग तीन दशक पहले तक सोत नदी दर्जनों गांव को वरदान बनी हुई थी। अविरल बहती नदी में नहाने के तब बच्चों से लेकर युवा बेताब रहते थे, तो बड़े लोग बच्चों और युवाओं को इसके गहरे पानी में जाने से मना करते थे, जबकि कई युवक पानी में तैराकी करने की होड़ में लगे रहते। चरवाहे पशुओं को नहलाने के लिए नदी किनारे आते थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया नदी के स्रोत बंद होने लगे। आज आलम यह है कि वर्षा ऋतु के दिनों में भी नदी में पानी नहीं है। इसके सूखने के बाद चरवाहे जरूर यहां आते हैं, लेकिन पशुओं को नहलाने के लिए नहीं, बल्कि नदी के बीच खड़ी घास खिलाने के लिए आते हैं। कुल मिलाकर %सदानीरा% जो क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनदायिनी हुआ करती थी, वह अब चरागाह में तब्दील हो चुकी है। अवैध कब्जे होने के चलते यह नदी अपना पुराना स्वरूप तक खो चुकी है।
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कभी रुहेला भी हो गए थे सम्मोहित
- सदानीरा सोत नदी के किनारे हरियाली देख रुहेला भी सम्मोहित हो गए थे। रुहेलों ने नगर के समीप बह रही सोत नदी किनारे अपना डेरा डाल लिया। समय बीतने के साथ ही रुहेला यहीं बस गए। बताते हैं कि पृथ्वीराज चौहान ने भी सोत नदी किनारे स्थित कस्बा मुड़िया धुरेकी में अपने राज्य का धुरा स्थापित किया था। मतलब साफ है कि पुराने समय में सोत नदी की सुंदरता ने तमाम राजा महाराजाओं को भी आकर्षित किया था।
क्या बोले लोग
-कई दशक पहले सोत नदी में काफी मात्रा में पानी मौजूद था। शासन को नदी के पुनर्जीवन के लिए बड़े स्तर पर कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए, ताकि सोतनदी में दोबारा पानी बह सके।
- हरद्वारी लाल, बिसौली
-सबसे पहले नदी पर जो कब्जा हो रहा है, उस जगह को कब्जा मुक्त कराने का प्रयास किया जाए। उसके बाद में सोत नदी में सफाई कराके इसके स्रोत खोलने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए।
-ब्रजेश शर्मा, बिसौली
सोत नदी अगर दोबारा से अपनी स्वरूप में आ जाए तो, इसके किनारे खेती करने वाले हजारों किसानों को एक तरह से नया जीवनदान मिल जाएगा।
धीरेंद्र प्रताप, दिसौली गंज
शासन व प्रशासन की उदासीनता का ही परिणाम है जो सोत नदी अपना अस्तित्व खो चुकी है। इसे पुनर्जीवित करने के लिए हम सभी को प्रयास करने होंगे। प्रशासन की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
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मोहम्मद सगीर, बिसौली
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