बदायूं। बारिश के मौसम में जलभराव और गंदे पानी से लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत स्वास्थ्यकर्मी लोगों को बीमारी के लक्षण, बचाव और समय पर उपचार के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
बारिश के दौरान कई स्थानों पर जलभराव होने से लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में दूषित पानी के संपर्क में आने से लेप्टोस्पायरोसिस का संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। यह बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित पशुओं के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैल सकती है। त्वचा पर कट या घाव होने पर संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
एसीएमओ डॉ. श्रीमोहन झा ने बताया कि लोगों को सलाह दी जा रही है कि जलभराव वाले स्थानों पर अनावश्यक जाने से बचें। यदि गंदे पानी में जाना जरूरी हो तो पैरों में जूते या गमबूट पहनें। शरीर के खुले हिस्सों को दूषित पानी के संपर्क में जाने से बचाएं। पानी में जाने के बाद हाथ-पैर को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोने की भी सलाह दी जा रही है।
विभाग के अनुसार, बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, उल्टी या आंखों में लालिमा जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और उपचार मिलने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। जिले में अभी लेप्टोस्पायरोसिस का मामला सामने नहीं आया है।
बारिश के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि बारिश के दौरान जगह-जगह जलभराव हो जाता है। ऐसे में पहले से त्वचा पर कट या घाव होने पर यह संक्रमण तेजी से फैलता है। -डॉ. श्रीमोहन झा, एसीएमओ, संक्रामक रोग प्रभारी