गंगा के उस पार के गांव जटा में कटान धीमा पड़ गया है लेकिन अभी भी गांव वालों में दहशत बरकरार है। राजस्व टीम पहुंची और उसने चार मकानों के ढह जाने की पुष्टि करते हुए एसडीएम को रिपोर्ट दे दी है। वहीं बाढ़ खंड की टीम ने भी जटा गांव में कटान की स्थितियों का जायजा लिया। टीम का कहना है कि अगर, नई जगह बसे गांव में कटान होता है तो गांव वाले चाहेंगे तो वह उस गांव में कटान निरोधक कार्यों का प्रसताव बनाकर भेज सकेंगे।
जटा गांव में पिछले तीन दिनों से गंगा कटान कर रही है। एसडीएम के निर्देश पर भी एक दिन देर से पहुंची राजस्व टीम में लेखपाल अशोक सक्सेना और कानूनगो आर्येंद्र ने अपनी रिपोर्ट एसडीएम दातागंज ओपी तिवारी को सौंप दी है। लेखपाल ने रफ्फन, राजमोहम्मद, शकील और सुनील के मकान कटान में ध्वस्त हो जाने की रिपोर्ट सौंपी है। बताया यह भी है कि गांव को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। कटान पुराने जगह बसे गांव में हुआ है।
इधर, बाढ़ खंड के एक्सईएन इंतियाजुर्रहमान के निर्देश पर सीपी सिंह, राधेश्याम, जुल्फिकार जेई मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि पुराने वही मकानों के अवशेष गिरे हैं जो पिछले सान कटान में ढहे थे। उनका कहना था कि नई जगह बसे ग्राम जटा में कटान प्रभावी नहीं है। अगर, इस नए गांव में कटान होता है तो प्रशासन और गांव वाले चाहते हैं तो कटान निरोधक के लिए वह बाढ़ खंड की ओर से प्रस्ताव बनवाकर शासन को भेज सकते हैं।