जिले से कुपोषण दूर भगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान में बाल विकास, स्वास्थ्य और आपूर्ति विभाग लगा है। एक सर्वे में जिले के अंदर कुपोषित बच्चों की संख्या 636 मिली है। अभी तक किसी भी कुपोषित बच्चे को विशेष इलाज के लिए जिले से बाहर रेफर करने की नौबत नहीं आई है।
इस अभियान को धार देने के लिए जिलाधिकारी शंभूनाथ, सीडीओ देवेंद्र सिंह कुशवाहा ने दो -दो गांव गोद लिए हैं। इनके अलावा जिला, तहसील और ब्लाक स्तर के अधिकारियों ने भी गांव गोद लिए हैं। यदि डीएम और सीडीओ को छोड़ दिया जाए तो जिले के अन्य अधिकारियों ने गोद लिए गांवों में कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई है। कुपोषित बच्चों वाले गांवों में एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकत्री अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। कुपोषण दूर करने के लिए बाल विकास विभाग द्वारा पुष्टाहार ही दिया जा रहा है। बच्चों का टीकाकरण भी किया जा रहा है। इसमें प्रधान और समाजसेवियों से सहयोग लिया जा रहा है। डीएम और सीडीओ के गोद लिए गांवों में विशेष निगरानी बरती जा रही है। दोनों अधिकारी गोद लिए गांवों को दौरा कर चुके हैं।
कुपोषित बच्चों की ब्लाक बार संख्या
अंबियापुर में 98
उझानी में 106
इस्लामनगर में 64
दातागंज में 118
म्याऊं में 131
सहसवान में 170
दहगवां में 166
सालारपुर में 175
कादरचौक में 150
समरेर में 49
बिसौली में 34
आसफपुर में115
वजीरगंज में 42
उसावां में 70
जगत में 115
शहर में 33
ये कहते हैं बाल रोग विशेषज्ञ
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अधिकतर बच्चों में कुपोषण मां के गर्भ से होता है। गर्भवती महिला को पौष्टिक आहार लेना चाहिए।
0 जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने पर डॉक्टर की सलाह से पौष्टिक आहार दें।
0 मां बच्चे को अपना दूध ही पिलाए।
0 छह माह के बाद बच्चों को दलिया, खिचड़ी, चावल आदि देना शुरू कर दें।
0 बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए पानी की शुद्धता पर विशेष ध्यान रहे।
- डॉ. इत्तिहाद आलम, बाल रोग विशेषज्ञ
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बच्चों के खानपान और उसकी चिकित्सकीय देखभाल के साथ ही कुपोषण दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें संबंधित विभागों को भी जोड़ा गया है।
- निर्मला शर्मा, डीपीओ, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग