श्रीराम लीला महोत्सव कमेटी की ओर से होने वाली रामलीला की ओर से होने
वाले आयोजन में बीते करीब पांच दशकों से लंका, रावण और मेघनाथ के पुतलों का
निर्माण मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा ही किया जाता रहा है। तालिब के
मुताबिक वह करीब 15 वर्षों से पिता के साथ आंवला, इफको फैक्ट्री आंवला,
वजीरगंज और अलीगंज में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले बनाते आ रहे हैं।
इस वर्ष पहली बार उन्हें बदायूं में रावण, मेघनाथ बनाने का मौका मिला है।
पिता के बीमार होने के बाद उन्होंने पहली बार अकेले पहला पुतला विसारतगंज
में वर्ष 2009 में बनाया था। तालिब बताते हैं कि इस काम में केवल मजदूरी ही
मिलती है, लेकिन उन्हें रावण और मेघनाथ के पुतले बनाने का शौक है, क्योंकि
इससे हिंदू भाइयों की भावनाएं जुड़ी होती हैं। बताया पुतलों में पीलीभीत
के पुत्तन की आतिशबाजी लगाई जाएगी।
...नहीं देख सकेंगे फितरत उल्ला का रावण
बदायूं।
श्री रामलीला महोत्सव कमेटी की ओर से कराई जानी वाली रामलीला में बीते
करीब पांच दशकों से फितरत उल्ला द्वारा बनाया गया रावण और मेघनाथ का पुतला
फूंका जाता रहा। कमेटी के मंत्री अरविंद कांत ने बताया कि फितरत उल्ला के
इंतकाल हो जाने और उनके घरवालों के पुतला बनाने से मना करने पर दूसरे लोगों
से पुतले बनवाने की व्यवस्था करनी पड़ी है।