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रामगंगा का कहर : खेती खत्म होने के कगार पर, किसान परिवारों के युवा मजदूरी करने जा रहे बाहर

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गांव तोफिया नगला में भरा बाढ़ का पानी । संवाद
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दातागंज। रामगंगा के कटान से दातागंज तहसील के जहां गांव में खेती के रकबे खत्म होने के कगार पर हैं तो वहीं तमाम गांवों की भूमि जलमग्न है। प्राकृतिक मार से तहसील क्षेत्र के आठ गांवों के किसान त्राहि-त्राहि कर उठे हैं। कई किसान परिवार तो रोजी-रोटी से तबाह हो गए हैं। इन गांवों के किसानों के परिवार के युवा गैर जनपद जाकर मजदूरी करने को मजबूर हो गए हैं।
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गांव बिहारीपुर में पिछली बार और इस बार रामगंगा के कटान ने किसानों पर कहर ढहा दिया है। ग्राम प्रधान कुलदीप सिंह ने बताया कि गांव का रकबा करीब 2200 बीघा है। इसमें करीब 300 बीघा जमीन गंगा एक्सप्रेस के निर्माण में चली गई, हालांकि उसका किसानों को मुआवजा मिल चुका है। इससे गांव का रकबा कम हुआ है। करीब इतनी की जमीन रामगंगा के बढ़े पानी की वजह से कट गई है। इस तरह गांव को रकबा 600 बीघा के करीब कम हो गया है।
रामगंगा इस गांव में लगातार कटान कर रही है। गांव के वीरेशपाल पर 26 बीघा जमीन थी। पूरी जमीन कटान में चली गई। उनके चार बेटे हैं। परिवार के भरण पोषण के लिए चारों बाहर नौकरी पर निकल गए हैं। इसके अलावा गांव के रत्नाकर, खेमकरन, रामश्री, वीरपाल, धनवीर, राजपाल, जयराम, ओमकार आदि की जमीन रामगंगा में समा चुकी है।
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नवादा बदन की प्रधान भानुप्रिया ने बताया कि उनके गांव का रकबा करीब 3500 बीघा है, जिसमें करीब 1500 बीघा जलमग्न है। गांव का मजरा कुंदरा में नीरज की जमीन जलमग्न है। नौनी टिकन्ना गांव में करीब 100 बीघा जमीन जलमग्न है। इसके अलावा हर्रामपुर, शेरपुर, लालपुर, पट्टी बिजा की जमीनें भी जलमग्न हो चुकी हैं। इनकी फसलें डूब चुकी हैं। किसानों के लिए रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। परिवार के भरण-पोषण के लिए ग्रामीण युवाओं को बाहर नौकरी करने के अलावा अब कोई चारा नहीं है।


सिमरिया में जेई को कैंप करने के निर्देश
सिमरिया गांव में कटान रोकने में ग्रामीणों ने सफलता पाई है। यहां कटान से गांव के कई मकानों को खतरा हो गया था। गांव वालों ने पेड़ों की डालियां डालकर कटान रोका है। कटान का खतरा गांव में अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इसलिए बाढ़ खंड के एक जेई को गांव में ही कैंप कराया गया है।



उर्द, बाजरा और तिल की फसलें डूबीं
अगर दो दिन में रामगंगा के जलस्तर में उतार हो जाए तो जलमग्न गांवों में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक खेती का रकबा बच सकता है। फिलहाल इसकी उम्मीद कम ही है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा बाजरा, उर्द और तिल की खेती होती है। तिलहल उत्पादन में तिल की खेती सबसे महंगी मानी जाती है। जलभराव के कारण फसलें चौपट हो गईं हैं।


बच्चों का पेट भरना पड़ रहा मुश्किल
क्षेत्र के सहसवान गांव वीरसहाय नगला, तोफिया नगला समेत छह गांव तटबंध और गंगा के बीच बसे हुए हैं। इन गांवों में चार अगस्त को बाढ़ का पानी घरों में घुस गया था। इससे करीब दो हजार लोग परेशान हैं। अब लोग जहरीले कीड़े आदि से खुद व बच्चों को बचाने में लग गए हैं। सहसवान क्षेत्र के गांव वीरसहाय नगला निवासी राजाराम का परिवार 14 दिन से गांव में पानी आ जाने के बाद से तटबंध पर झोंपड़ी डालकर रह रहा है। शनिवार को वह अपनी पत्नी को दवा दिलाने सहसवान गए थे। छह साल के बेटे संजीव को छप्पर में चारपाई पर सोता छोड़ गए थे। दवा दिलाकर जब लौटे तो चारपाई पर बच्चा मृत अवस्था में मिला। इसके बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ऐसे ही कछला के वार्ड दो में पांच साल का बच्चा बाढ़ के पानी में डूबकर मर गया। साथ ही गंगा का जलस्तर कम होने से अब रास्तों पर कीचड़ होने लगी है।







फोटो-13

स्वास्थ्य विभाग लगा रहा कैंप

जलस्तर कम हुआ है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम कैंप लगाकर लोगों का इलाज कर रही है। गांव में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। पानी उतरने से कीचड़ बढ़ेगी। तब तक परिवार के लोग तटबंध पर ही रहने को मजबूर हैं। - रूम सिंह, तोफिया नगला




पानी कम होने के बाद संक्रमण का डर

हर बार बाढ़ की मार झेलते हैं। जलस्तर कम होने के बाद गांव में संक्रमण फैलता है। बीमारी से परिवार के परिवार परेशान रहते हैं। इस बार भी जलस्तर कम होने लगा है। अब बीमारियों का डर सता रहा है। इसी के साथ ही जहरीले कीड़े, सांप आदि का डर बढ़ गया है। - करन सिंह, तोफिया नगला


खाद्य सामग्री का एक बार गांवों में वितरण करा दिया गया है। जरूरत पड़ने पर और सामग्री बांटी जाएगी। फिलहाल पानी कम होने से लोगों को राहत है। संक्रमण न फैले इसके लिए कीटनाशक, एंटी लार्वा आदि दवाओं का छिड़काव गांवों में कराया जाएगा। -सांई आश्रित शाकमुरी, एसडीएम सहसवान

दलदल होने से शहर तक पहुंचने के लिए करनी होगी जद्दोजहद
उसहैत। गंगा का जलस्तर कम होने से दलदल हो गया है। लोगों को शहर तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। गांव टिकाई खाम निवासी संतवीर का कहना है कि अब कटान का डर बना हुआ है। साथ ही जगह-जगह कीचड़ और गंदगी पनपने लगी है। गांव की लगभग एक हजार के करीब आबादी है, यहां लोगों की आय का मुख्य साधन खेती है।
इस बार लगातार नरौरा से पानी छोड़े जाने की वजह से समय से पहले ही बाढ़ की स्थिति बन गई थी। उनका कहना है कि बाढ़ की वजह से उनके खेतों में अरबी सहित बाजरे की फसल बर्बाद हो गई है। लगभग 30 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। गांव के ही भगवान दास का कहना है कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद गांव में जगह-जगह दलदल हो गया है। अब निकलना मुश्किल हो रहा है, साथ ही मच्छर डंक मार रहे हैं। संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। संवाद


रविवार को बढ़ गया रामगंगा का जलस्तर
बदायूं। रामगंगा शनिवार शाम मीटरगेज पर 160.790 पर थी। रविवार को बढ़ोतरी के साथ सुबह 10 बजे 160.900 पर पहुंच गई। शाम छह बजे 60 सेमी घटकर 160.840 मीटर पर आ गई। इस प्रकार शनिवार की अपेक्षा रविवार को रामगंगा का जलस्तर काफी बढ़ा। बदायूं में रामगंगा नीचाई क्षेत्र में होने के कारण ज्यादा असर करती है। इसलिए शनिवार और रविवार को यहां बाढ़ के हालात बरकरार रहे। कई गांवों में रामगंगा ने कटान भी कर दिया है। संवाद

गंगा अब भी 14 सेमी खतरे के निशान से ऊपर

गंगा का जलस्तर मापने के लिए कछला में मीटर गेज है। इसमें 162.40 पर खतरे का निशान है। गंगा का ऊपरी डैमों से शनिवार की अपेक्षा रविवार को डिस्चार्ज कम हुआ है, लेकिन गंगा अब भी खतरे के निशान से 14 सेमी ऊपर चल रही है। यही वजह है कि बाढ़ के हालातों में अभी ज्यादा सुधार नहीं है। सहसवान व उसहैत क्षेत्र में बाढ़ के हालात बने हुए हैं।






-कछला मीटरगेज पर गंगा का जलस्तर

गंगा नदी 162.54 मीटर खतरे के निशान से ऊपर
नरौरा डैम का डिस्चार्ज-134584 क्यूसेक
बिजनौर डैम का डिस्चार्ज-136475 क्यूसेक
हरिद्वार डैम का डिस्चार्ज-126855 क्यूसेक

गांव तोफिया नगला में भरा बाढ़ का पानी । संवाद

गांव तोफिया नगला में भरा बाढ़ का पानी । संवाद

गांव तोफिया नगला में भरा बाढ़ का पानी । संवाद

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