कादरचौक। भटेले परंपरा के चलते कादरचौक समेत क्षेत्र के 14 गांवों में भाई-बहन के प्यार का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को मनाया गया। बहनों ने अपने भाइयों के हाथों पर राखियां बांधी और मिठाई खिलाई। भाइयों ने बहनों को उपहार दिए।
कादरचौक में 170 गांव आते हैं, लेकिन इनमें से 14 गांवों में भटेले परंपरा मनाई जाती है। इन गांवों में एक दिन पहले रक्षाबंधन मनाया गया। शुक्रवार सुबह से ही बहनों का अपने भाइयों के घरों पर पहुंचना शुरू हो गया। रक्षाबंधन की वजह से कस्बे में दुकानों पर काफी भीड़ रही। बहनों ने अपने भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीदी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में बताते हैं कि 1182 ईस्वी में दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर आक्रमण कर दिया था। तब यह क्षेत्र महोबा में शामिल था। उस समय महोबा के चंदेल शासक परमार का राज था। उनकी रानी चंद्रबली ने मुंहबोले भाई आल्हा से अपनी व राज्य की सुरक्षा की मांग की। लड़ाई रक्षाबंधन वाले दिन होनी तय थी। ऐसे में महान योद्धा आल्हा ने राज्य के 14 गांवों में एक दिन पहले ही रक्षाबंधन मनाने की घोषणा कर दी और अगले दिन युद्ध में शामिल होने चले गए। तभी से इन 14 गांवों में हर साल रक्षाबंधन एक दिन पहले मनाने की परंपरा है।
इन गांवों में मनाया गया रक्षाबंधन
कादरचौक, लभारी, चौडे़रा, मामूरगंज, गढि़या, ततारपुर, कचौरा, देवी नगला, सिसौरा, गनेश नगला, कलुआ नगला, किशूपरा, कैथुलिया, कैथोला में रक्षाबंधन मनाया गया।
गंगा की सहायक सुतिया नदी में सिराई गईं भुंजरियां
कादरचौक क्षेत्र के किला मंदिर के पास सुतिया पर भुजरियों को सिराया गया। सुतिया गंगा नदी की सहायक नदी है। रक्षा बंधन के साथ रस्म अदायगी में महिलाओं ने भुंजरियां सिराने के साथ मंगल गीत भी गाईं।