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सूखे गुजरे सावन, भादों में भी टूट रही आस

Fri, 04 Sep 2015 06:32 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बदायूं
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बारिश न होने से जिले के किसानों को पिछली की खरीफ की फसल से हाथ धोना पड़ा था। बाद में रबी का सीजन आया, तो अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने फसलें बर्बाद कर दीं। अभी मुआवजा भी पूरी तरह से नहीं बंटा है कि खरीफ की इस फसल को भी बारिश नष्ट करने पर तुली है। धान, बाजरा, मक्का, तिल और उरद आदि फसलें ऊपर से सूख रही हैं। बिजली मिल नहीं रही है। नलकूप न चलने से किसानों के खेत सूखे पड़े हैं। पंपिंगसेट से ही सिंचाई एक सहारा है। इसके लिए किसान की लागत अधिक बैठती है। इधर कमला कीट ने भी बदलते मौसम में उड़द और तिल आदि फसलों को चट करना शुरू कर दिया है। इससे किसान की सांसें रुकी हुई हैं। लगातार तीन मौसमों में उसे प्रकृति ने भारी नुकसान पहुंचाया है। अभी तक 25 से 30 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं। सूखा जैसे आसार बन गए हैं।
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यह कहते हैं किसान नेता
बारिश न होने से किसानों के खेत सूख रहे हैं। नलकूपों को बिजली नहीं मिल रही है। अपने सूख रही फसलों को देख किसानों की आंखों में आंसू हैं। लगातार चोट खाए किसान को प्रकृति और कितना प्रताड़ित करेगी। यह फसल भी मारी गई तो किसान पूरी तरह तबाह हो जाएगी।
- राजेश सक्सेना, जिलाध्यक्ष बहुजन किसान दल

किसानों को प्रकृति तो मार ही रही है। सरकारें भी किसान के बारे में कुछ नहीं सोच रहीं। बारिश न होने के कारण 30 प्रतिशत से अधिक खरीफ की फसल को नुकसान हुआ है। सरकार चाहे तो नलकूपों को भरपूर बिजली देकर और डीजल सस्ता कर किसानों को राहत पहुंचा सकती है, लेकिन किसानों के प्रति उपेक्षा जारी है। इसके परिणाम सरकार को भी भुगतने होंगे।
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- धर्मपाल सिंह, जिलाध्यक्ष भाकियू  

हालात सूखे जैसे ही बन गए हैं। इस समय जब फसलों को पानी की जरूरत है, तो बारिश नहीं हो रही है। बारिश न होने के कारण खरीफ की फसलें प्रभावित हो रही हैं। जो आगे बारिश न होने पर और अधकि प्रभावित हो सकती हैं।
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- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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