पौराणिक और धार्मिक स्थल सरसोता पर चल रहे एकादशी मेला पर बारिश का साया पड़ने से इसका रंग फीका हो गया। सोमवार को सुबह से हो रही बारिश के कारण मेले में सन्नाटा रहा। दोपहर बाद बारिश थमने पर आईं महिलाओं ने सरसोता कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना की।
द्वादशी पर पहुंची महिलाओं ने स्नान के बाद हनुमान मंदिर में प्रसाद चढ़ाया और पूजा की। कुंड की परिक्रमा भी की। इसके बाद एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुरुआत की। मीना बाजार के अलावा कहीं ज्यादा भीड़ देखने को नहीं मिली। दोपहर को पहुंची महिलाओं ने मेले से रंग, बेर, गुलाल, मिट्टी के बर्तन आदि सामान खरीदा।
फाग गाने की परंपरा तोड़ रही दम
मालूम हो दूसरे दिन का मेला केवल महिलाओं के लिए ही होता है। मेले में महिलाओं की टोलियों द्वारा होली गीत और फाग गाने की परंपरा अब खत्म सी होती दिख रही है। मेले में इस बार महिलाओं की टोलियां ढोलक की थाप और मजीरों की संगत के संग फाग गाती नहीं दिखीं। अलबत्ता डनलपों पर बैठकर मेला आ रही कुछ महिलाओं ने इस परंपरा की रस्म अदायगी जरूर की।