पुलिस और प्रशासन ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को बहुत सोच समझकर बदायूं-कासगंज बार्डर पर रोका। प्रशासन को यह जगह इसलिए सेफ लगी कि यहां भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ इकट्ठी नहीं हो पाएगी। लिहाजा हो हल्ला नहीं होगा। रविवार को बरेली में प्रधानमंत्री की रैली की वजह से पुलिस और प्रशासन भी फूंक फूंक कर कदम रख रहा था।
वाजपेयी आगरा के लिए किस वक्त निकलेंगे, यह बात पार्टी के चुनिंदा नेताओं को ही पता थी। सूत्रों की मानें तो वाजपेयी ने शुक्रवार रात ही मन बना लिया था कि वह आगरा जाकर विहिप नेता अरुण माहौर के शोकाकुल घरवालों से मिलेंगे। शोकाकुल परिवार को इसकी रात में सूचना दे दी गई थी। लेकिन यह बात आगरा से लीक हो गई। भनक लगते ही बरेली के पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारी सतर्क हो गए। तय हुआ कि वाजपेयी को बरेली-बदायूं के बार्डर पर रोक लिया जाए। रविवार को चूंकि बरेली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा है, प्रशासन ने अंतिम समय में योजना बलदते हुए बदायूं और कासगंज की सीमा पर रोकने की योजना बना ली। पुलिस की कोशिश थी कि कार्यकर्ता न जुटने पाएं। नहीं तो बवाल भी हो सकता है, जिसकी गूंज पीएम की रैली में सुनाई पड़ सकती है। इसीलिए पुलिस और प्रशासन के बड़े अफसरों ने पूरी कार्रवाई को बड़े ही गोपनीय अंदाज में अंजाम तक पहुंचाया।
अफसर लेते रहे पल-पल की लोकेशन
लक्ष्मीकांत वाजपेयी के बरेली से निकलते ही प्रशासनिक अफसरों की बेचैनी बढ़ती गई। वाजपेयी को जब बदायूं-कासगंज वार्डर पर रोक लिया गया तो भी अफसरों के सेलफोन पर कॉल आती रही। कॉल रिसीव करने वाले यही कहते सुनाई दिए कि सब कुछ ठीक है। वार्डर से कासगंज की ओर उन्हें कहकर ले जाया गया कि गेस्ट हाउस में वार्ता के बाद उन्हें आगरा रवाना कर दिया जाएगा, लेकिन प्रशासन ने जो योजना बनाई, उसमें वह कामयाब भी हो गया।