बदायूं। गन्ना क्रय सेंटरों के बंटवारे में भी जिले में जमकर मनमानी की गई है। सरकारी चीनी मिल के बजाय निजी चीनी मिलों को ज्यादा तरजीह दी गई है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में स्थित दो चीनी मिलों में एक के पास 52 सेंटर हैं, जबकि सरकारी चीनी मिल के पास महज एक। साफ है कि ऐसे में मिल में गन्ना भी कम पहुंचेगा।
जिले में दो चीनी मिलें हैं। इनमें बिसौली में यदु चीनी मिल प्राइवेट है, जबकि शहर से सटे शेखूपुर कस्बे में द किसान सहकारी समिति चीनी मिल है। हालांकि यदु चीनी मिल की पेराई क्षमता सरकारी चीनी मिल से करीब छह गुना अधिक है। यदु चीनी मिल एक दिन में 70 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई करती है, जबकि किसान सहकारी चीनी मिल मात्र 12 हजार क्विंटल। साफ है कि प्राइवेट चीनी मिल छह गुना ज्यादा गन्ना पेर रही है। यही कारण है कि यदु चीनी मिल को 52 सेंटर आवंटित किए गए हैं, जबकि सरकारी चीनी मिल को महज एक।
इसके अलावा चीनी मिल गेट पर एक सेंटर बनाया गया है। ऐसे में जिले का अधिकांश गन्ना यदु चीनी मिल में जा रहा है, जबकि भुगतान के मामले में यदु चीनी मिल का रिकॉर्ड सबसे ज्यादा खराब है। किसानों का समय से भुगतान न करने पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है। कई बार वहां धरना प्रदर्शन हो चुके हैं। काफी मुश्किलों के बाद जैसे-तैसे चीनी मिल ने पिछले साल की पेराई का भुगतान पिछले महीने किया है। वहीं किसान सहकारी चीनी मिल भुगतान के मामले में हमेशा अव्वल रही है।