उझानी। निजी नर्सिंग होम बिना पंजीकरण के संचालित होने की शिकायत पर चिकित्सा अधीक्षक (एमओआईसी) डॉ. देवेंद्र कुमार ने मौके पर पहुंचकर जांच की। उन्होंने संचालक को नोटिस देकर तीन दिन के भीतर पंजीकरण के दस्तावेज पेश करने की हिदायत दी।
कस्बे के अहीरटोला मोहल्ला निवासी योगेश पाराशर ने बृहस्पतिवार पूर्वाह्न एमओआईसी डॉ. देवेंद्र कुमार से निजी नर्सिंग होम की शिकायत की थी। आरोप है कि नर्सिंग होम बिना पंजीकरण के संचालित हैं। मरीजों की जान से खिलबाड़ किया जा रहा है। शुक्रवार दोपहर एमओआईसी डॉ. कुमार स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों की चार सदस्यीय टीम के साथ मौके पर पहुंच गए।
उन्होंने नर्सिंग होम संचालक से पंजीकरण और डॉक्टरों के बारे में जानकारी की। संचालक की ओर एमओआईसी को पंजीकरण के दस्तावेज भी नहीं दिखाए गए। जांच करके लौटे एमओआईसी डॉ. कुमार ने बताया कि नर्सिंग होम संचालक को तीन दिन के अंदर पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज सीएचसी परिसर में आकर प्रस्तुत करने का नोटिस दिया गया है।
इससे पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिसर की स्थिति पर भी गौर किया। टीम को मौके पर दो- तीन मरीज भी मिले। उनसे भी जानकारी की गई। बता दें कि करीब डेढ़ साल पहले भी इसी नर्सिंग होम संचालक को दस्तावेज दिखाने का नोटिस दिया गया था, लेकिन उस वक्त मामला ठंडा पड़ गया था। एमओआईसी का कहना है कि संचालक अगर पंजीकरण के दस्तावेज दिखाने नहीं आता है तो निजी नर्सिंग होम और उसके संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिना पंजीकरण और भी चल रहे नर्सिंग होम
कस्बे में बिना पंजीकरण के कुछ और नर्सिंग होम संचालित होने का शोर है। पिछले साल दो-तीन निजी नर्सिंग होम संचालकों को नोटिस दिए गए थे। उस वक्त एक नर्सिंग होम में प्रसूता की मौत का मामला भी सामने आया था। इसके बाद ही तत्कालीन सीएमओ रामेश्वर मिश्रा ने बदायूं से टीम भेजकर जांच कराई थी। एक नर्सिंग होम सील भी किया था। हालांकि बाद में वह खुल गया था, लेकिन खुला कैसे, इसे लेकर अभी तक पसोपेश बना हुआ है।
एक नर्सिंग होम को लेकर एमओआईसी के पास शिकायत आई थी। शिकायत की जांच के लिए एमओआईसी मौके पर पहुंचे थे। नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। बिना पंजीकरण के नर्सिंग होम संचालित नहीं होने दिए जाएंगे। - डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ