ककोड़ा मेला के लिए बनने लगी सड़क
ढाई सौ मीटर पश्चिम को हटा मेला
सड़क पर पतेल डालने के लिए जंगल से पतेल काट कर लाई जाती है। वहीं मेला के नक्शा के अनुसार जिला पंचायत के कर्मचारी मेला की भूमि पर दागबेल लगाकर झंडी गड़वाने के काम को अमली जामा पहना रहे हैं। मेला का क्षेत्रफल पूरब-पश्चिम लगभग डेढ़ किमी होगा।
स्थानीय लोगों को रोजगार का इंतजार
मेला में बनने वाली सड़क महत्वपूर्ण है। जंगल की पतेल जिससे बीड़ा बांध कर रेत में सड़क बनाई जाती है। जिसको काटकर स्थानीय लोग ठेकेदार को बेचते हैं। एक डनलप 250 से 400 रुपये तक का बेचा जा रहा है। महत्वपूर्ण ठेके अभी तक लटके हुए हैं। मिनी कुंभ की रीढ़ कहे जाने वाले ठेके अभी तक नहीं हो सके हैं। सिरकी-पाल शौचालय टेंट के ठेके नहीं हुए हैं। वहीं इनकी व्यवस्था के लिए टेंडर के समय कोई नहीं आया।
खादी और खाकी भी घाटे का कारण
गत वर्ष इनको घाटा होने के कारण भी ठेके होने में विलंब का कारण है। इन लोगों पर खादी और खाकी का रौब भी घाटे कारण बनता है। जिला पंचायत के द्वारा लगवाए गए टेंटों और शौचालयों के बाद भी राजनैतिक दबाव पुलिसिया रौब इस व्यवस्था में अफरातफरी पैदा करता है। जिस कारण ठेकेदार घाटे में जाते हैं। इस माौके पर जिला पंचायत अिभ्ायंता संजय शर्मा ने कहा कि मेला ककोड़ा के लिए जिला पंचायत पूरे जोश के साथ लगा है। पांच नवंबर को ठेके होंगे। सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएंगी।